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0 सरकार को लाखों के राजस्व का लग रहा है चूना
0 अंडरग्राउंड तलघरों में धड़धड़ा रही हैं मशीनें, यूपी-एमपी के कई शहरों में है सप्लाई
कोंच-उरई। नकली के मामले में लगभग समूचे बुंदेलखंड में कुख्यात कोंच मंडी में घी-तेल से लेकर नकली गुटखा निर्माण का काला बाजार पूरी रौ में है। कस्बे में कई इलाके ऐसे हैं जहां तलघरों में धड़ाधड़ बज रहीं मशीनें ब्रांडेड गुटखों के नाम से गुटखा तैयार कर रहीं हैं और सरकारी राजस्व को जमकर पलीता लगा रहीं हैं। अब यहां बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि ये गुटखा माफिया सरकारी विभागों की छत्रछाया में फलफूल रहे हैं या अधिकारियों को बाईपास करके यह काला कारोबार चलाया जा रहा है। रजिस्टर्ड गुटखा संचालकों की अगर मानें तो उनकी सप्लाई के बुरी तरह प्रभावित होने का बड़ा कारण यही नकली गुटखा है जो राजस्व की चोरी करके बाजारों तक पहुंचाये जा रहे हैं।
गुटखा बैसे भी कैंसर जैसी घातक बीमारी का संवाहक है उस पर भी अगर साबका नकली से पड़ जाये तो कोढ में खाज की स्थिति बनते देर नहीं लगती। कोंच में नकली गुटखा निर्माण और बड़े पैमाने पर सप्लाई का गोरखधंधा धड़ल्ले से चल रहा है। नया पटेल नगर इलाका इसके लिये काफी मुफीद भी है और कुख्यात भी। इसके अलावा भी कस्बे में कई अन्य इलाकों में भी तलघरों में धड़ल्ले से गुटखा फैक्ट्रियां चल रहीं हैं जो सरकार को लाखों रुपये प्रतिदिन के राजस्व को खुलेआम चूना लगा रहीं हैं। गौरतलब यह है कि यह गुटखा माफिया ब्रांडेड गुटखों के नाम का सहारा लेकर नकली रैपरों में इनकी पैकिंग करके यूपी और एमपी तक सप्लाई कर रहे हैं। ये माफिया संबंधित विभागों की छत्रछाया में फलफूल रहे हैं या अधिकारियों को इनकी खबर नहीं है यह तो नहीं मालूम लेकिन जब भी ये गुटखा की खेपें पकड़ी जाती हैं तो सुविधा शुल्क लेकर इन्हें छोड़ दिया जाता है। इसके चलते इन माफियाओं के हौसले काफी बढे हुये हैं। अगर यह गोरखधंधा इसी तरह चलता रहा तो सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान तो होगा ही, जन स्वास्थ्य के साथ भी ये निरंकुश माफिया खिलवाड़ करते रहेंगे क्योंकि इनके सम्मिश्रण के कोई मानक तो तय होते नहीं हैं।
फोटो-कोंच2-बस की छत पर लदे गुटखे के बोरे
इंसेट में-
कुंतलों नकली खोवा भी सप्लाई होता है कोंच से
गायें और भैंसें न के बराबर होने के बाबजूद आसपास के ग्रामीण अंचलों से कुंतलों खोवा बाहर की मंडियों को रोजाना सप्लाई किया जाता है। इस ओर से खाद्य विभाग भी आंखें मूंदे बैठा है और नकली व मिलावटी का यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है। बताना समीचीन होगा कि यहां इलाके में गायों और भैंसों की खासी कमी है, इतनी कि बच्चों के पीने के लिये भी दूध के लाले हैं। इसके बाबजूद यहां खोवा का अबैध कारोबार खूब फलफूल रहा है। ग्रामीण अंचलों में सबसे ज्यादा नकली और मिलावटी का यह काला कारोबार चल रहा है और रोडवेज बसों के मार्फत प्रतिदिन झांसी जैसी बड़ी मंडियों को सप्लाई किया जाता है। जनस्वास्थ्य की चिंता करने वाला विभाग खाद्य विभाग भी इस ओर से आंखें मूंदे बैठा है। अगर सुबह सबेरे बस अड्डे पर ही छापा मारा जाये तो कई कुंतल खोवा खाद्य विभाग के हाथ लग सकता है।

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