माधौगढ़-उरई। फर्जी क्लीनिक संचालन के मामले में सीएमओ का संदिग्ध रवैया सामने आया है। सीएमओ के मन में अचानक इस मामले में जागी हमदर्दी कई सवालों का सबब बन गई है।
सीएमओ डाॅ. अशोक कुमार ने एक महीना पहले कस्बे में नीलकंठ अस्पताल के नाम से चल रहे फर्जीबाड़े को पकड़ा था। उनके पहुंचने पर अस्पताल के कर्ताधर्ता भाग निकले थे। जिसके बाद सीएमओ ने अस्पताल को मजिस्ट्रेट की सहायता से पुलिस के द्वारा सील करा दिया।
हालांकि इसके कुछ ही दिन बाद सीएमओ इस मामले में ढीले पड़ गये थे। आज तक बिना डिग्री और लाइसेंस के अस्पताल के संचालन पर कोई एफआईआर नही हो पाई है। लेकिन अब तो सीएमओ ने इंतहा ही कर दी। उन्होंने माधौगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधीक्षक और पुलिस को पत्र भेजा है जिसमें बड़ी मासूमियत से कहा गया है कि फर्जी अस्पताल का संचालक फरार है। लेकिन लंबे समय तक मकान सील रहने से उसमें खराबी आ जाने से मकान मालिक पीड़ित हो रहा है। इसलिए मकान की सील खुलवा दी जाय तांकि मकान मालिक उसका रखरखाव कर सके। आपत्तिजनक बात यह है कि मकान मालिक अवधेश दीक्षित का नाम अस्पताल के बोर्ड में बतौर संरक्षक नियुक्ति किया गया था जो फर्जी अस्पताल चलाने में उन्हें सहभागी साबित करता है। सीएमओ साहब फिर भी अगर तथ्यों की अनदेखी कर उन पर मेहरबानी कर रहे हैं तो जाहिर है कि इसके पीछे नगद नारायण के प्रति उनकी श्रद्धा की भूमिका ही होगी।






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