22orai02 22orai01उरई। अगर आपके मरीज की हालत सीरियस है और आप यह उम्मीद कर रहे हैं कि जिला अस्पताल में बेहतर इलाज मिलने से उसकी जिंदगी बच जायेगी तो यह आपकी बहुत बड़ी खामख्याली है। जिला अस्पताल में मरीजो के साथ खुलेआम ऐसा खिलवाड़ हो रहा है कि अगर मरीज इसके बाद सलामत बच जाये तो इसमें दवा का नही पूरी तरह दुआ का असर ही माना जाना चाहिए।
जिला अस्पताल में मीडिया टीम ने शनिवार को मरीजों के इलाज की व्यवस्था का जायजा लेने के लिए दौरा किया तो हालात देखकर दंग रह जाना पड़ा। वार्ड नं. 10 में मीरा नाम की एक मरीज को राजेश कुमार वार्ड ब्वाॅय इंजेक्शन लगाने में जुटा था जबकि वार्ड ब्वाॅय से इंजेक्शन लगवाना मरीज की जान से खेलना है। इतना ही नही वार्ड ब्वाॅय नशे की भी हालत मे था। अस्पताल के लोगों ने नाम न देने की शर्त पर बताया कि राजेश स्मैक पीने का आदी है। इंजेक्शन लगाने में वह मरीज से 100 रुपये ऐठ लेता है जिससे वह अपनी तलब पूरी कर सके। सीएमएस और डाॅक्टरों की कुछ कामों में इतनी ज्यादा मशरूफियत है कि उन्हें वार्ड ब्वाॅय का इस तरह इलाज में हाथ बटाना रास आता है।
टीम ने वार्डों के भीतर का हाल जाना। आधा दर्जन बैड के बीच एक नर्स तैनात होनी चाहिए लेकिन हर वार्ड में 20 बैड के बीच मात्र एक नर्स की व्यवस्था इस समय चल रही है जिससे मरीजों का हाल बेहाल है। वह नर्स भी केवल सुबह और शाम को 8 बजे एक चक्कर लगाकर पल्ला झाड़ लेती है।
एक तीमारदार जुबैदा ने बताया कि डाॅक्टर ने उसे बाहर से दवा लाने का पर्चा थमा दिया यह दवा उसे साढ़े चार सौ रुपये में खरीदनी पड़ी। सबसे बड़ी बात यह है कि बाहर की दवा भी ऐसी होती है जिसमें कमीशन ज्यादा होने के कारण कोई दम नही रहती। ऐसे इलाज के भुलावे में कई मरीज मौत के मुंह में पहुंच गये। जिन्हें तीमारदारों को बाद में रेफर कराकर ले जाना पड़ा।
जानकारों का कहना है कि डाॅक्टर कागजों में तो जिला अस्पताल की ड्यूटी पर होते हैं लेकिन वे किसी प्राइवेट नर्सिंग होम में अतिरिक्त कमाई के लिए इंगेज बने रहते हैं। जिला अस्पताल में भी अगर किसी का आॅपरेशन होता है तो पांच से छह हजार रुपये की चढ़ौती डाॅक्टर को चढ़ानी पड़ती है।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा व्यवस्था लोगों के सरोकार से सीधी जुड़ी है इसलिए मायावती सरकार में वरिष्ठ अधिकारी बराबर सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण करते रहते थे जिससे सीएमओ और सीएमएस दबाव में रहते थे। लेकिन यह परिपाटी वर्तमान सरकार में बंद है जिससे डाॅक्टर छुटटा हो चुके हैं। मौजूद डीएम संदीप कौर शुरू में मेडिकल काॅलेज अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंची थीं। उस समय उन्होंने ऐलान किया था कि वे और एसडीएम साहिबान समय-समय पर सरकारी अस्पतालों का औचक निरीक्षण करते रहेंगे जिससे डाॅक्टर व चिकित्सा प्रशासन के अधिकारी शुरू में सतर्क रहे लेकिन जब न डीएम ने किसी अस्पताल की सुध ली और न ही एसडीएम ने तो डाॅक्टर बेफिक्र होकर डयूटी में फिर मनमानी करने लगे।
उधर मीडिया टीम के अस्पताल में अव्यवस्थाओं को पकड़ने की खबर कानों में पड़ने के बाद हड़बड़ाये सीएमएस डाॅ. जीके निगम ने सामने आकर कहा कि वार्ड ब्वाॅय द्वारा पैसे लेकर मरीजों को इंजेक्शन लगाने की जांच की जायेगी। उन्होंने कहा कि नर्सों की वार्डों में निर्धारित तैनाती स्टाॅफ की कमी के कारण संभव नही हो रही है।

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