cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngजालौन-उरई। भक्त अगर भगवान पर भरोसा करता है, तो भगवान भी उसकी रक्षा करते हैं। धन की लोलुपता में व्यक्ति धार्मिक कार्याे और भागवत् से विमुख होता जा रहा है। जबकि उसे पता होना चाहिए कि जिस पर भगवान की कृपा हो जाती है, उसका कोई बाल बांका नहीं कर पाता है। उक्त बात चुर्खी रोड स्थित अलखिया माता मंदिर पर आयोजित साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन भगवताचार्य पं. सुदामा महाराज ने उपस्थित भगवद् प्रेमियों के समक्ष कही।
चुर्खीरोड स्थित अलखिया माता मंदिर पर साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। जिसके छठवें दिन भगवताचार्य पं. सुदामा महाराज ने उपस्थित श्रेताओं को कथा श्रवण कराते हुए कहा कि भक्त अगर भगवान् पर भरोसा करता है, तो भगवान् भी उसकी रक्षा करते हैं। जिस पर भगवान की कृपा हो जाती है, उसका कोई बाल बांका नहीं कर पाता है। लेकिन आज का मानव उक्त सभी बाते भूलकर धन की लोलुपता में धार्मिक कार्याे और भागवत से विमुख होता जा रहा है। अब तो ऐसा भी होता है कि भगवान् की कथा होती रहती है और लोग सामने से ही निकल जाते हैं। यही कारण है कि आज लोगों के जीवन में अशांति बनी रहती है। जिस व्यक्ति मन अशांत होता है, उसके पास सब कुछ होते भी, कुछ नहीं होता है। शांति उसी को मिलती है, जिसके मन में संतुष्टि होती है और यह संतुष्टि भगवद् भक्ति से ही प्राप्त होती है। इसके बाद भगवताचार्य ने नरसिंह अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि कयाधु माता ने प्रहलाद को संस्कारवान् बनाया था। जबकि उनका पिता हिरण्यकश्यप नारायण वैरी था। वह एक दिन वह मदिराचल पर तप करने जा रहा था कि तभी रास्ते में एक तोता के बालक ने उससे नारायण कह दिया। यह सुनते ही हिरण्यकश्यप रास्ते से ही वापस लौट आया। कथावाचक ने कहा कि माता ही बालक की प्रथम पाठशाला होती है, इसलिए माताओं को चाहिए कि वे अपने बालकों को संस्कारवान् बनाए। माता-पिता के गुणों का उसकी संतान पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। अगर मां धार्मिक संस्कारों की ओर बढ़ेगी, तो बालक भी उसी राह पर चलकर संस्कारी बनेंगे और अपने कुल का नाम रौशन करेंगे। उन्होंने कहा कि कथा भागवत और सत्संग में जाने से व्यक्ति को सद्गति प्राप्त होती है। मृत्युलोक के बाद परलोक में व्यक्ति द्वारा किए गए कर्म ही उसके साथ जाते हैं। जिस व्यक्ति ने सद्कर्म किए होगें वे ही भवसागर से पार उतरेंगे अन्यथा वह दुर्गति को प्राप्त होंगे। इसलिए व्यक्ति को हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए। कथा श्रवण कर रहे श्रद्धालुओं में भागवत कथा के पारीक्षत पुजारी महंत पं. रूपनारायण शास्त्री, नरेंद्र कुमार, विनोद कुमार, अवधेश कुमार आदि सहित लगभग एक सैंकड़ा से अधिक भागवत प्रेमियों ने आस्था के साथ कथा को सुनकर जीवन में अच्छे कर्मों को अपनाने की प्रेरणा ली।

Leave a comment