उरई। पिछले चार सालों में कोंच ब्लाॅक में तैनात रहे खंड शिक्षाधिकारी और जिले के बेसिक शिक्षाधिकारी राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कृत किये जायेंगे। ऐसा क्यों? यह सवाल आप पूंछ सकते हैं जिसका उत्तर जानकर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की दिलेरी पर आपको भी नाज हो सकता है।
कोंच तहसील का एक गांव है रुखना जिसमें पिछले चार वर्षों से सोमा निरंजन की प्राथमिक विद्यालय में तैनाती है। लेकिन गांव वाले और बच्चे उन्हें पहचानते तक नही हैं। दरअसल सोमा निरंजन 100 बीघा से ज्यादा के एक बड़े कास्तकार की बहू हैं जिससे उनकी अपनी कुछ मर्यादायें हैं। फिर भी वे कर्तव्य के प्रति इतनी सचेष्ट है कि वे इन चार सालों में 10-12 बार तो स्कूल आने की जहमत तो उठा ही चुकी हैं जबकि बीएसए और खंड शिक्षाधिकारी की तरफ से उन्हें स्कूल आने की तकलीफ से पूरी तरह छूट प्राप्त थी। वजह यह है कि बेसिक शिक्षा विभाग अपने आपको धन्य महसूस कर रहा है कि इतने बड़े घर की बहू का नाम उनके एक स्कूल से जुड़ा है जिसकी ब्रांडिंग विभाग की शान को बढ़ाने वाला है।
मीडिया टीम गत दिनों इस स्कूल में पहुंची तो स्कूल के कमरों में ताला जड़ा मिला। बाहर बच्चे घर से लाये गये टिफिन खोलकर खाने में लगे थे। दूसरी कक्षा की बालिका मधु और चैथी कक्षा के छात्र प्रताप ने मासूमियत से बताया कि उनके घरवाले रोजाना उन्हें स्कूल पहुंचाते हैं। लेकिन उन्हें बहनजी कभी नही मिलतीं।
ग्रामीणों अनिरुद्ध यादव, ललनजू पाल, नीलेंद्र यादव और दिनेश के मुताबिक वे न जाने कितनी बार बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से अपने बच्चों के भविष्य पर रहम करने की गुहार लगा चुके हैं। लेकिन खंड शिक्षाधिकारी तक ने यहां आकर यह देखना गंवारा नही किया कि स्कूल खुल रहा है कि नहीं। उन्होंने कहा कि स्कूल चलो अभियान को लेकर उनसे विभाग के लोग मिले थे तो उन्होंने कहा था कि जब स्कूल खुलता ही नही है तो काहे का स्कूल चलो अभियान। लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग को यह उलाहना सुनकर भी शर्म नही आई। कितने वीतराग हैं बीएसए और बीईओ, सचमुच संतो से भी कहीं ज्यादा।
नई पीढ़ी के भविष्य निर्माण में इसी प्रकार का योगदान देकर राष्ट्र भक्ति का परिचय देने वाले जिले के बीएसए और कोंच के खंड शिक्षाधिकारियों को इसीलिए राष्ट्रपति से सम्मानित कराने का फैसला लिया गया है तांकि दूसरे जिलों के बेसिक शिक्षाधिकारियों को भी उनके अनुकरण के लिए प्रेरित किया जा सके।





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