cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। विधान परिषद की बाल एवं महिला मामलों की आशा किशोर के नेतृत्व वाली 15 सदस्यीय उपसमिति के जिले के दो दिन के प्रवास में सरकारी प्रयासों की शर्मनाक हकीकत उजागर हुई।
उपसमिति ने रात में जिला अस्पताल और महिला थाने का निरीक्षण किया। जिला अस्पताल में अदभुत स्थिति देखने को मिली जब समिति बच्चा वार्ड में पहुंची। लेकिन वार्ड में एक भी बच्चा भर्ती नही था। बच्चों में चल रहे जबर्दस्त बीमारी के प्रकोप के इस मौसम में भी बच्चा वार्ड का सूना होना अपने आप में यह बात चींख-चींख कर कह रहा था कि सीएमएस को वार्ड की सुंदरता का इतना ज्यादा ख्याल है कि बीमार बच्चों को भर्ती करके वे इस पर दाग लगने नही देना चाहते।
उपसमिति ने जिला कारागार जाकर महिला कैदियों से बातचीत की। इसके बाद महिलाओं और बच्चों के पुष्टाहार को तैयार करने वाली नीलबरी फूड प्रोडक्ट फैक्ट्री का निरीक्षण भी उपसमिति के सदस्यों ने किया।
उपसमिति ने दूसरे दिन बुधवार को उसरगांव में अपनी पड़ताल की शुरूआत की। उन्होंने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की हालत परखने के लिए उसरगांव के सरकारी स्कूलों में बच्चों से बहुत मामूली प्रश्न पूंछे लेकिन बच्चें उनका जबाव देने में भी लाचार दिखे। उम्मीद है कि नौनिहालों की पढ़ाई को मृत्यु शैय्या पर पहुंचा देने का कारनामा दिखाने का भरपूर इनाम उपसमिति अपनी रिपोर्ट के जरिए बीएसए प्रदीप पांडेय को दिलायेगी। उसरगांव में उपसमिति ने आंगनवाड़ी केंद्रों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान सीडीपीओ और सुपरवाइजर ने बताया कि सभी गर्भवतियों को हौसला पोषण देने में बजट में कमी की वजह से कठिनाई आ रही है तो उपसमिति के सदस्य बोले बजट की मांग करें लेकिन हर गर्भवती को पोषण पूरा मिलना चाहिए।
कुकरगांव में पहुंची समिति को एक विद्यालय में ताला लटका मिला। वजह पता चली कि गुरूजी पढ़ाई बंद करके सम्मान समारोह में भाग लेने गये हैं। गुरूजी कितने नेक है जो बच्चों की पढ़ाई को अनदेखा करने का पुरस्कार अपने सम्मान के रूप में प्राप्त कर रहे होंगे। उपसमिति ने उनकी इस महानता पर एक बार फिर बीएसए और शिक्षक की भूरि-भूरि सराहना की। दो खुले स्कूलों में उन्हें बच्चों से बातचीत करने का मौका मिला तो पता चला कि बच्चों की नादानी सुरक्षित रखने के लिए मास्टर साहब लोग कितना श्रम कर रहे हैं। बच्चों का न ओलम का ज्ञान था और न पहाड़े का। दरअसल वर्तमान बीएसए के नेतृत्व में बच्चों की शिक्षा की क्रांतिकारी अवधारणा सृजित हो रही है। बच्चों की निर्मल अनभिज्ञता पर सांसारिक ज्ञान की काली छाया को रोककर उनके दिव्यत्व को सहेजे रखने का जो कमाल बीएसए दिखा रहे हैं उससे उपसमिति के सदस्य काफी प्रभावित नजर आये।

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