कोंचj-उरई। खुशियों और उमंगों के त्योहार दीपावली में कहीं एक छोटी सी चिंगारी खलल न डाल दे इसके लिये आतिशबाजी की दुकानों मेंं तमाम सुरक्षा इंतजामों की जरूरत होती है लेकिन यहां धनुताल पर लगाई गई दुकानों की स्थिति काफी विस्फोटक है, दुकानदारों द्वारा सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किया जाना कहीं रंग में भंग न डाल दे। दुकानों पर बालू की बोरियां और पानी के ड्रम पर्याप्त मात्रा में रखे जाने चाहिये जो किसी भी दुर्घटना की स्थिति में आग पर काबू पा लेने में मददगार बन सकें लेकिन वहां ये चीजें महज दिखावे के लिये ही रखे गये हैं।

जिलाधिकारी संदीप कौर द्वारा पूर्व में ही इस तरह के निर्देश जारी किये जा चुके हैं कि किसी भी संभावित दुर्घटना की स्थिति में वहां सुरक्षा और अग्निशमन के पर्याप्त साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित हो। यहां आबादी से काफी हट कर धनुताल मैदान में आतिशबाजी की दुकानें लगाई गई हैं, बैसे तो कुल नौ दुकानों का आतिशबाजी बिक्री का लाईसेंस है लेकिन देखा जा रहा है कि घनी आबादी बाले इलाकों में भी तमाम छोटे दुकानदार घरों के बाहर या छोटी छोटी दुकानों पर भी आतिशबाजी की बिक्री कर रहे हैं। हालांकि यह स्थिति मौका देख चार पैसे का जुगाड़ कर लेने की है लेकिन दुर्घटनायें कभी कह कर नहीं आतीं, जरा सी चिंगारी छूटी और किसी बड़ी घटना की वायस बन जाती है। बीच आबादी लगाई गई इन दुकानों पर तो आग बुझाने के इंतजाम हैं ही नहीं। धनुताल पर भी आग लगने की स्थिति में उसे बुझाने के लिये उपयोग में लाये जाने बाले साधन कमतर दिखे। दुकानों पर पानी के ड्रम तो रखे थे लेकिन उनमें पानी न के बराबर था या था ही नहीं, बालू की बोरियां इक्का दुक्का मिली वह भी आधी अधूरी मात्र औपचारिकता दर्शाने के लिये रखी गई थीं। सीज फायर के भी न के बराबर इंतजाम दिख रहे हैं, जो हैं भी वे आउट डेटेड हैं, ऐसी स्थिति एसडीएम मुईनुल इस्लाम द्वारा किये गये निरीक्षण में निकल कर सामने आई है और दुकानदारों को नोटिस भी दिये गये हैं किंतु नतीजा ढाक के तीन पात ही निकला।
यदि कोई विपरीत परिस्थिति बनती है तो यह इंतजाम आग पर काबू पाने की स्थिति में केवल हाथी के दांत ही साबित होंगे।
‘जान बहुत कीमती है, इसे सहेजें
दीपावली बच्चों के लिये मस्ती करने का त्योहार है, घरों में अच्छी अच्छी मिठाइयां और पकवान तो बनते ही हैं, पटाखे छुड़ा कर बच्चे खूब मस्ती भी करते हैं लेकिन यह मस्ती रंग में भंग न डाल दे इसके लिये जरूरी है कि आतिशबाजी छुड़ाते समय बच्चे अपने माता-पिता या बड़ों की देखरेख में ही पटाखे या फुलझड़ी चलायें ताकि वे किसी भी दुर्घटना से सुरक्षित रह सकें। जान बहुत ही कीमती है, इसे न केवल अपने लिये बल्कि अपनों के लिये भी सहेज कर रखें। यह भी ध्यान रखें कि दुश्मन देश के बने पटाखों को तो बिल्कुल भी हाथ नहीं लगाना है।
-अक्षत
‘खतरनाक बमों या पटाखों से बचें
दीपावली का त्योहार हो और बच्चे पटाखे न फोड़ें यह तो हो नहीं सकता है, लेकिन आतिशबाजी करते वक्त सावधानी की सख्त जरूरत है तभी हम त्योहार का असली मजा ले सकेंगे।
बड़ों के साथ रह कर उनकी देखरेख में ही आतिशबाजी का मजा लें और आबाज करने बाले खतरनाक बमों या पटाखों से तो बच कर ही रहें, इनका प्रयोग रोकने का सबसे बढिया तरीका यही है कि माता-पिता ऐसे पटाखे लायें ही न जो खतरनाक हों। बच्चो, अबकी दफा ‘नो चायनीजÓ, पापा से कहना कि अपने देश के बने पटाखे ही लेकर आयें।
-सारांश







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