उरई। पुलिस की बातों पर अगर यकीन किया जायें तो विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही देशी असलहा बनाने वाली असलहा फैक्ट्रियों का बाजार फिर गर्म हो गया है। एक पखवारे के अंदर जिले की पुलिस ने आज दूसरी असलहा फैक्ट्री पकड़ी। इसमें एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। साथ ही कथित फैक्ट्री स्थल से कई बने और अधबने असलहे व उन्हें बनाने के उपकरणों की बरामदगी का दावा भी पुलिस ने किया है।
पुलिस लाइन के सभागृह में पत्रकारों से वार्ता करते हुए अपर पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र शाक्य ने बताया कि कदौरा थाने के ग्राम मवई ब्राहम्ण में राजू तिवारी के टयूबवैल पर इस फैक्ट्री का संचालन हो रहा था। सुरागरशी में स्पेशल टाॅस्क टीम प्रभारी मों. आरिफ को इसकी सूचना मिली। इसके बाद उन्होंने शनिवार को सुबह कदौरा थानाध्यक्ष लालबहादुर यादव के साथ फोर्स ले जाकर दविश दे दी। पुलिस दल के पहुंचने के समय असलहे बनाने के लिए ठोंका-पीटी चल रही थी। इसमें जुटे कालपी थाने के कुरहना निवासी सुनील द्विवेदी को पुलिस ने धर दबोचा। मौके से 315 बोर की देशी रायफल, 315 बोर की अद्धी, 315 बोर के पांच तमंचे, 12 बोर के दो तमंचे, एक तमंचा 32 बोर का, 12 बोर का अधबना एक तमंचा, 315 बोर का एक अधबना तमंचा, कारतूस, नाल आदि असलहे बनाने में प्रयोग होने वाली अन्य सामग्री भी पुलिस ने मौके से जब्त की।
उन्होंने बताया कि सुनील ने पूंछतांछ में कहा है कि वह पिछले पांच-छह महीने से फैक्ट्री चला रहा है। उसने बताया कि विधानसभा चुनाव के मददे नजर असलहे बनाने के लिए अग्रिम आर्डर आ रहे हैं। हालांकि अभी किस-किस संभावित प्रत्याशी ने सुनील द्विवेदी को असलहे बनाने का आर्डर दिया था यह पूंछने पर एडीशनल एसपी अटक गये। उन्होंने बताया कि सुनील ने अपने बनाये असलहों की खपत उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश के कई जिलों में होने की बात कही है। जिसमें निर्माण से लेकर मार्केटिंग तक उसके कई सहयोगी शामिल हैं। इनके नाम नोट करके पुलिस इनकों भी पकड़ने में जुट पड़ी है।
एक ओर इस गुडवर्क पर पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है। तो दूसरी ओर जनमानस में पुलिस की कहानी का मजाक उड़ाया जा रहा है। एक अनुभवी और जानकार ने कहा कि पुलिस को पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव का अंतर नही मालूम। हो सकता है कि पंचायत चुनाव में अभी भी देशी असलहे बहुत कारगर रहते हों लेकिन जो लोग विधानसभा चुनाव का युद्ध लड़ने के लिए अवैध असलहों की जरूरत महसूस करते हैं उन्हें किसी गांव गंवई के बनाये हुए अधकचरे असलहों की ओर देखना तक गंवारा नही होता। पुलिस द्वारा टटपुजियां असलहा फैक्ट्री को विधानसभा चुनाव से जोड़ना उसकी शेखचिल्ली सोच को उजागर कर रहा है।
उधर एडीशनल एसपी ने यह भी बताया कि पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह ने असलहा फैक्ट्री पकड़ने वाली टीम को पांच हजार रुपये का नगद पुरस्कार भी मंजूर किया है।







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