• लोक देवी-देवताओं की भी पूजा हुई दीवाली पर
  • मंहगाई के बाबजूद खूब चली बारूद, मिठाइयों की रही जबर्दस्त बिक्री
    कोंच। सुख, समृद्घि और खुशियों का त्योहार दीपावली यहां नगर व क्षेत्र में पारंपरिक उत्साह और श्रद्घाभाव के साथ मनाया गया।

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घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में लोगों ने धन और वैभव की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी और विघ्नहर्ता, सुखदाता लम्बोदर गणेश की पूजा अर्चना कर उन्हें छप्पन भोग लगाये, उनके साथ भगवती लक्ष्मी के कोषाध्यक्ष कुबेर, साईं बाबा आदि की भी पूजा कर सुख समृद्घि की कामना की गई। दीपावली पर्व पर तमाम लोक देवी-देवता जिन्हें साल भर याद भी नहीं किया जाता है, भी श्रद्घाभाव से पूजे गये और उनसे कामना की गई कि बर्ष पर्यंत उनकी खुशियों में वे बाधक न बनें। बिजली की झालरें और दीपों की कतारें लोगों को आनंदित कर उनके मन में खुशियों का संचार कर रही थीं। नगर पालिका कार्यालय भी विद्युत झालरों की झिलमिलाहट से रोशन रहा, सागर तालाब में रंग बिरंगे फव्वारे ने लोगों का मन मोह लिया। आसमान से बातें कर रही मंहगाई का असर त्योहार के उत्साह को कम करने में नाकाम रहा, बच्चों, बूढों और जवानों ने खूब आतिशबाजी छुड़ाई, आधी रात तक आसमान रंगबिरंगी छटा बिखेरता रहा। मिठाई की इतनी बिक्री हुई कि शाम तक अधिकांश दुकानों का माल साफ हो चुका था। अबकी दफा चायनीज माल के बहिष्कार का भी खासा असर दिखा और लोगों ने रोशनी के लिये परंपरागत देसी दीयों का ही ज्यादा प्रयोग किया।

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