उरई। जिला जेल में क्षमता से दूने बंदी है तो स्टाॅफ आधे से कम। यह विसंगति जेल में अव्यवस्था और अराजकता का कारण बन चुकी है। मध्यप्रदेश की सबसे सुरक्षित भोपाल जेल से आठ खतरनाक बंदियों के भाग निकलने की घटना के बाद पूरे देश की तरह जिले का जेल प्रशासन भी सकते मे है। इसलिए जेल की सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की नये सिरे से समीक्षा की गई है।
भोपाल की घटना के आलोक में जेल अधीक्षक का तदर्थ प्रभार संभाले हुए सिटी मजिस्ट्रेट अनिल कुमार मिश्रा ने जिला जेल का बारीकी से निरीक्षण किया और सुरक्षा से संबंधित जानकारियां स्टाॅफ से प्राप्त कीं। इसमें यह बात प्रकाश में आई कि जेल में 81 अधिकारी कर्मचारियों के स्टाॅफ के नियतन के सापेक्ष केवल 35 के स्टाॅफ की तैनाती है। इसके कारण जेल की व्यवस्था की कसावट में कमी आई है।
स्टाॅफ की कमी की वजह से बैरकों की सफाई खुद बंदियों को करनी पड़ रही है। अन्य इंतजाम भी लड़खड़ाये हुए हैं। हालांकि इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह का सुराख नही होने दिया जा रहा है लेकिन ओवर बर्डन से आगे चलकर कहीं कोई चूंक न हो जाये इसके मददेनजर प्रभारी जेल अधीक्षक ने शासन को जेल का स्टाॅफ पूरा करने का अनुरोध पत्र भिजवा दिया है।







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