उरई। जालौन टाइम्स के उरई-जालौन सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र के सर्वे का रिजल्ट सुरक्षित क्षेत्रों में बसपा की विशेष गौरगीरी के ऐलान का खोखलापन साबित कर रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों और जातियों के बीच कराये गये इस सर्वे में जो रुझान सामने आया है। उसके मुताबिक यहां भाजपा तमाम पिछड़ी जातियों के लगभग सेंट परसेंट समर्थन की वजह से सबसे आगे दिख रही है।
सुरक्षित सीटों पर बसपा नेतृत्व ने कुछ दिन पहले विशेष व्यूह रचना की घोषणा की थी। दलितों की पार्टी होते हुए भी सुरक्षित क्षेत्रों में कामयाबी से दूर रहने के कारण बसपा को काफी नीचा देखना पड़ता है। बसपा नेतृत्व द्वारा अपनी इस कमजोरी को संज्ञान में लेकर सुरक्षित क्षेत्रों में विशेष प्रबंधन का जो दम भरा गया था। कम से कम उरई-जालौन सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र में तो उसकी हकीकत हवा-हवाई ऐलान में सिमटी दिखाई देती है।
बसपा नेतृत्व का ऐलान यह था कि सुरक्षित क्षेत्रों में ब्राहम्ण वोटों को बसपा के साथ जुटाने के लिए पार्टी के हैवीवेट नेता सतीश मिश्रा पूरी कटिबद्धता के साथ मैदान में उतरेंगे। इसी तरह अन्य जातियों के प्रमुख नेता भी अपनी-अपनी जाति का वोट बसपा की झोली में पड़वाने के लिए मेहनत करने जुट जायेंगे। लेकिन 300 लोगों से की गई बातचीत का निष्कर्ष यह है कि बसपा का यह सारा सरअंजाम कागजों भर में है। कम से कम उरई-जालौन सुरक्षित सीट पर ब्राहम्ण सहित पूरा सवर्ण वोट भाजपा के पक्ष में लामबंद दिखाई दे रहा है। इसके साथ-साथ पाल, कुशवाहा, प्रजापति, विश्वकर्मा आदि पिछड़ी बिरादरियां भी पूरी शिद्दत के साथ भाजपा के पाले में खड़े रहने का मन बनाये हुए हैं। और तो और लोधियों व कुर्मियों में भी यहां भाजपा का सिक्का तेजी से चल रहा है। भाजपा ने यादवों तक में सेंध लगाई है।
उरई-जालौन विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की टक्कर में जो दल सबसे मजबूत है अभी तक की स्थिति में उसमें बेशक समाजवादी पार्टी का ही नाम लिया जा सकता है। यहां तक कि मुसलमान वोटरों में भी समाजवादी पार्टी की पैठ ज्यादा मजबूत है। हालांकि बसपा के साथ दलित इस सीट पर पूरी मजबूती से खड़ा है। केवल चर्मकार बिरादरी ही नही दूसरी दलित बिरादरियों का वोट भी बसपा के साथ बहुतायत में है। लेकिन पिछड़ा वोट निल हो जाने के चलते उसकी हालत पतली हो गई है।
राहुल गांधी की 27 साल यूपी बेहाल यात्रा का असर भी इस क्षेत्र में दिखाई दिया। कांग्रेस यहां मुकाबले में तो पहले से ही नही है लेकिन राहुल गांधी की यात्रा का असर यह है कि गांव-गांव में कांग्रेस का नाम लेने वालों की एक जमात खड़ी हो गई है।
दूसरी ओर पार्टियां भी अपने स्तर से सर्वे करा रही हैं। सूत्र बताते हैं कि बसपा के सर्वें में भी उरई-जालौन सीट पर उसकी पतली हालत का फीडबैक हाईकमान को मिला है। जिसके चलते इस सीट से उम्मीदवार बदलकर किसी प्रभावी चेहरे को सामने लाने की चर्चा जोर पकड़ने लगी है।






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