0 निर्धारित जगहों पर भी नागरिकों को राहत नहीं, पंप बाले फुटकर नहीं दे रहे हैं पेट्रोल
0 साप्ताहिक बंदी के कारण अभी करेंसी पर प्रतिबंध बेअसर दिखा
कोंच-उरई। बीती शाम पीएम मोदी द्वारा पुरानी पांच सौ और हजार के नोटों बाली करेंसी को बंद किये जाने के बाद चारों ओर अफरा तफरी का आलम है। लोग परेशान हैं सौदा सुलफ तक के लिये, सब्जी भाजी से लेकर रोजमर्रा की जरूरत के सामानों की दुकानों पर नागरिकों को इन नोटों को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार द्वारा जिन स्थानों का निर्धारण इन प्रतिबंधित नोटों को स्वीकार किये जाने की घोषणा की गई है उन जगहों पर भी लोगों को मायूसी हाथ लग रही है। पेट्रोल पंपों पर लोगों को सौ पचास का पेट्रोल नहीं मिलने की शिकायतें जब प्रशासन में बैठे अधिकारियों तक पहुंची तो एसडीएम मुईनुल इस्लाम एवं तहसीलदार भूपाल सिंह ने पंपों पर जाकर कर्मचारियों को तगड़ी हिदायत देते हुये कहा कि जो ग्राहक जितने का पेट्रोल या डीजल मांगता है उसे उतने का नहीं देने पर कड़ी कार्यवाही की जायेगी।
बीती रात प्रधानमंत्री मोदी का हजार पांच सौ के नोटों को प्रचलन से बाहर कर देने के बाद चारों तरफ अफरा तफरी का माहौल है। इस बात को लेकर लोग परेशान हैं कि उनकी अंटी में हजार पांच सौ की जो करेंसी है वह कूड़ा हो गई है क्योंकि कोई भी दुकानदार इन नोटों के बदले सौदा देने को तैयार नहीं है। हालांकि आज साप्ताहिक बंदी का दिन होने के कारण पंचानवे फीसदी दुकानें बंद रहीं और करेंसी प्रतिबंधित होने का असर आज बाजारों में न के बराबर दिखा, कल गुरुवार को जब बाजार खुलेगा तब इसका असर देखने को मिलेगा। पीएम ने जरूरी सेवाओं को प्रतिबंध से दो दिन के लिये बाहर रखते हुये कुछ स्थान निर्धारित किये थे वहां भी लोगों को दिक्कतें पेश आ रहीं हैं। आज पेट्रोल पंपों का नजारा देखने लायक था, लंबी लंबी लाइनें लगी थीं लेकिन उन्हें वहां भी राहत नहीं थी, पंप कर्मचारी सौ पचास का तेल देने को राजी नहीं थे। इस बाबत उन्होंने अपनी अलग समस्या बताई कि उनके पास खुदरा करेंसी नहीं होने के कारण मजबूरी में उन्हें हजार पांच सौ का तेल देना पड़ रहा है। इसकी शिकायतें एसडीएम मुईनुल इस्लाम के पास भी पहुंची तो वह तहसीलदार भूपाल सिंह के साथ पंपों पर पहुंचे और कर्मचारियों को कड़ी हिदायत दी कि जो ग्राहक जितने का तेल मांगे उसे उतना देना पड़ेगा, आइंदा इसकी शिकायत मिली तो कड़ी कार्यवाही की जायेगी।
सरकारी दफ्तर भी अछूते नहीं रहे
करेंसी बंद होने का असर सरकारी काम काज में भी साफ दिखा। उप निबंधक कार्यालय में रजिस्ट्री कराने बालों का आज खासा टोटा रहा। इधर, आज बिजली विभाग ने महाकैम्प आहूत किया था और बिलों का भुगतान करने वालों की अच्छी खासी भीड़ भी वहां मौजूद थी लेकिन उनके हाथों में हजार पांच सौ के नोट देख अधिकारियों ने पटल बंद कर दिया। इस प्रतिबंध का असर विभाग की दैनिक बसूली पर भी दिखा, औसतन एक से डेढ लाख का राजस्व रोज ही पटल पर आता रहा है लेकिन आज केवल 18 बिल ही जमा हो सके और 14 हजार 468 की आमदनी होना इस बात की तस्दीक करने बाला रहा कि विभाग ने केवल सौ रुपये तक के नोट ही स्वीकार किये। हजार पांच सौ के नोट स्वीकार नहीं करने को लेकर स्थानीय अधिकारियों का कहना रहा कि ऊपर से ऐसे आदेश मिले हैं कि इन नोटों को कतई न स्वीकार किया जाये। परेशान लोग इस बात को लेकर हैरान रहे कि जब सरकारी विभाग जिसे सारा कैश बैंक में ही जमा कराना है, नहीं लेगा तो अन्य जगह कैसे इन नोटों को चलाया जा सकता है।
ज्यादातर लोगों ने सराही मोदी की पहल
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पीएम मोदी द्वारा 1000-500 की करेंसी को अचानक प्रतिबंधित किये जाने से हालांकि आम जन जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है लेकिन ज्यादातर का मानना है कि इसके दूरगामी सुखद परिणाम होंगे। पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मूलचंद्र निरंजन ने इस कदम का स्वागत करते हुये कहा है कि इसके दूरगामी परिणाम देश हित में होंगे और ब्लैक मनी की समस्या से जूझ रहे देश को राहत मिलेगी। गृहणी रेनू सोनी ने भी मोदी के इस काला धन के खिलाफ सर्जीकल स्ट्राइक का स्वागत किया है लेकिन महिला होने के नाते पति से छिपा कर रखे गये पैसों के बाहर आ जाने को लेकर वह थोड़ा असहज हैं। उनका साफ कहना है कि पति को यह पैसा देने के बजाये वह ससुर को पास ज्यादा सुरक्षित समझती हैं।
फोटो- मूलचंद्र निरंजन, रेनू सोनी






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