cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। सरकारी विभागों में प्राइवेट टैक्सियां अनुबंधित करने का अधिकारियों को शौक बहुत ज्यादा चर्राने लगा है जिससे तार-तार हो रही प्रशासनिक गरिमा को बचाने के लिए आखिर राजकीय चालक सामने आ गये।
इस मुददे पर राजकीय वाहन चालक महासंघ के अध्यक्ष सीताराम शर्मा और महासचिव महाराज सिंह ने डीएम से प्रतिनिधि मंडल के साथ भेंट की। जब उन्होंने डीएम को यह बताया कि नीली बत्ती लगी गाड़ी खड़ी देखकर जब हम लोग उसमें बैठे आदमी को अधिकारी समझकर सलाम करने के लिए तैयार होते हैं तो पता चलता है कि गाड़ी में किसी शादी की बुकिंग के लोग बैठे हुए हैं। प्रशासन के लिए यह स्थिति बेहद अपमानजनक है। डीएम ने भी इस पर गंभीर एतराज जताया और आश्वासन दिया कि जब तक कोई विभागाध्यक्ष वित्त विभाग से प्राइवेट गाड़ी को अनुबंधित करने की सहमति नही लेगा और इसके लिए अपनाये गये वाहन पर टैक्सी परमिट की अनिवार्यता का ख्याल नही रखेगा तब तक कोई अनधिकृत वाहन सरकारी विभागों में नही चलने दिया जायेगा।
भेंट में राजकीय वाहन चालक महासंघ के प्रतिनिधि मंडल ने समाज कल्याण विभाग के चालक साथी मोहम्मद यामीन की अनुचित तरीके से हमीरपुर में संबद्धता की ओर भी जिलाधिकारी का ध्यानाकर्षित कराया। कई विभागों में वाहन न होने के कारण खाली समय गुजार रहे वाहन चालकों को अस्थाई तौर पर अन्य जरूरतमंद विभाग से संबद्ध करने, जल संस्थान में अधिशाषी अभियंता द्वारा जीप चालक बालक दास के किये जा रहे उत्पीड़न को रोकने और जीपें, ट्रक, टैªक्टर आदि विभिन्न विभागों के खड़े वाहनों को अपेक्षित मरम्मत कराकर चलवाने की मांग भी महासंघ ने डीएम से की।

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