उरई। बड़े नोट बंद किये जाने के फैसले से लोगों को होने वाली परेशानी बचाने के नाम पर किये गये एलान हवा-हवाई साबित हुए। केंद्र सरकार इस मामले में अपने विभागों के कर्मचारियों तक की निरंकुशता पर लगाम नही लगा पाई।
रेलवे टिकटों को लेकर सरकार ने घोषणा की थी कि सभी बुकिंग क्लर्कों को पांच सौ और हजार का नोट देने वालों को न लौटाने के निर्देश जारी कर दिये गये हैं लेकिन इस पर भरोसा करना दिल्ली स्थित प्रसिद्ध साहित्यकार डाॅ. सत्यवान को भारी पड़ गया।
बुकिंग क्लर्क ने कहा कि छुटटा लेकर आओ तभी टिकट दिया जायेगा अगर पांच सौ का नोट चलाना है तो उसे 25 रुपये कमीशन देना पड़ेगा। डाॅ. सत्यवान इस पर उखड़ पड़े जिसके बाद बुकिंग क्लर्क ने आरपीएफ को बुला लिया। आरपीएफ का एक दर्जन से ज्यादा सिपाहियों का लाव-लश्कर इस तरह उन्हें पकड़ने के लिए पहुंच गया जैसे वहां किसी आतंकवादी के मौजूद होने की खबर उसको मिल गई हो। डाॅ. सत्यवान को आरपीएफ थाने तक लाया गया और एक कागज पर हस्ताक्षर कराने के बाद ही उन्हें छोड़ा गया।
डाॅ. सत्यवान के साथ हुए इस व्यवहार की इप्टा, श्रमजीवी प्रेस क्लब, पहचान साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था आदि संगठनों ने घोर निंदा की है और केंद्र सरकार से उनके साथ अभद्रता करने वाले क्लर्क के निलंबन की मांग करते हुए एक सामूहिक ज्ञापन केंद्र सरकार को भेजने का फैसला लिया है।






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