उरई। काला धन धारकों को अपना पैसा सफेद कराने के लिए भ्रष्ट बैंक तंत्र ने सरेआम द्वार खोल रखे हैं। इसकी मिसाल रोजाना सामने आ रही है फिर भी बैंकों की निगरानी शुरू कराने में सरकार के दिलचस्पी न लेने से कहीं न कहीं इस आरोप को दम मिल रही है कि इसके पीछे हो रही कमीशनबाजी का पैसा सरकार में बैठे लोगों तक पहुंच रहा है।
नोटबंदी के बाद 500 और 1000 के नोट बदलने में आम लोगों को भले ही कितनी भी मुश्किल झेलनी पड़ रही हो लेकिन जिनके पास इन नोटों की शक्ल में अघोषित खजाना है उन्हें भ्रष्ट बैंक तंत्र सेफ पैसेज देने में गुरेज नही कर रहा। स्टेट बैंक की मुख्य शाखा तक में काला धन धारकों को ऐसी सुविधा उपलब्ध होने का उदाहरण सामने आने से लोग दंग रह गये हैं।
मुख्य शाखा के एक खाता धारक योगेंद्र स्वर्णकार का कंप्यूटर का बिजनेस है। आजकल परीक्षा फार्म भरे जा रहे हैं जिससे उनके पास रोजाना पैसे आ रहे हैं। हर रोज वे दुकान की रकम बैंक में जमा कराने जाते हैं। सोमवार को स्टेट बैंक की मैन ब्रांच में योगेंद्र शाम साढ़े चार बजे 40 हजार रुपये अपने खाते में जमा कराने पहुंचे। उन्होंने दो-दो हजार रुपये के 13, सौ-सौ के 112, पचास-पचास के 16, बीस-बीस के 50 और 10-10 के सौ नोट काउंटर की क्लर्क को दिये। डिपोजिट स्लिप में नोट का यही ब्यौरा उन्होंने दर्ज किया है। जिसकी काउंटर स्लिप भी उनके पास है। लेकिन वे हैरान रह गये जब उन्होंने काउंटर की क्लर्क को कंप्यूटर में उनके खाते में 500-500 के नोट दिये जाने का ब्यौरा फीड कर दिया और उनके दो हजार के सारे नोट व सौ के सौ नोटो की गडडी अलग कर चपरासी को थमा दिये जो बेनामी लेनदेन के तहत एक व्यापारी को रकम देने पहुंच गया। योगेंद्र ने काउंटर क्लर्क से विरोध किया तो वह उन्हें जलील करने पर उतर आई। इस पर वे सीनियर बैंक मैनेजर के कक्ष में जा पहुंचे। सीनियर मैनेजर ने उनकी बात सुनने का अभिनय करते हुए उन्हें अपने पास बैठा लिया और लगभग आधा घंटे तक डिटेन रखने के बाद बोले कि अब किसने कौन से नोट दिये यह पता लगाना मुश्किल है। इसलिए पचड़े में न पड़कर आप घर जायें। साफ जाहिर हो गया कि मैनेजर साहब भी कोयले की इस दलाली में अपने हाथ रंगे हुए हैं। योगेंद्र को बावजूद इसके नींद नही आई। 500 के इतने नोट जमा कराने का कंप्यूटरी ब्यौरा कहीं उनके गले में फंस न जाये इस आशंका के चलते उक्त धांधली को रात में ही उन्होंने अपनी फेसबुक आईडी पर वायरल कर दिया।
बताया जाता है कि यह अकेला स्टेट बैंक का मामला नही है। ग्रामीण बैंक की शाखाओं से लेकर एचडीएफसी जैसे निजी बैंकों तक में अघोषित नगदी धारकों को महती सुविधा प्रदान कर बैंक मैनेजर अपनी जेबें परम स्वतंत्र न सिर पर कोई के भाव से परिपूरित होकर गर्म करने में लगे हैं। बताया जाता है कि नोट बदलवाने का धंधा बैंकों में 15 परसेंट में चल रहा है। आरोप तो यहा तक लगाये जा रहे हैं कि काले से सफेद की कमाई का बंदर बांट वित्त मंत्री के स्तर तक हो रहा है जिसकी वजह से बैंक मैनेजरों पर सख्ती बरतने में सरकार कोई रुचि नही दिखा रही।
उधर एलडीएम पीके राय ने यह जानकारी दी जाने पर कहा कि वे इस शिकायत को गंभीरता से संज्ञान में लेगें। उन्होंने स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के सीनियर मैनेजर से अविलंब इस बाबत वार्ता करने की बात भी कही।






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