cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। उद्योग बंधु की बैठक में नोट बंदी को लेकर चखचख हो गई। नेता एजेंडे को भूलकर इस मुददे पर आपस में भिड़ पड़े। सांसद प्रतिनिधि ने सरकार के पक्ष को प्रभावशाली तरीके से रखने का प्रयास किया लेकिन सीनियर विरोधी नेताओं की दमदार और जोशीली दलीलों के आगे उन्हें अपनी बोलती बंद करनी पड़ी।
उद्योग बंधु की बैठक कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिलाधिकारी संदीप कौर की अध्यक्षता में चल रही थी। इस दौरान डीएम संदीप कौर ने नोट बंदी की चर्चा आने पर कहा कि सरकार ने काले धन की सफाई के लिए यह कदम उठाया है। इससे जो समस्यायें पैदा हो रही हैं उनका हल करने को प्रशासन जिले में पूरा प्रयास कर रहा है। लोगों को भी इसमे सहयोग करना चाहिए। सांसद प्रतिनिधि अनिरुद्ध मिश्रा ने भी उनके सुर में सुर मिलाना शुरू कर दिया तो लोग भड़क गये।
व्यापारी नेता केके गहोई बोले कि क्या खाक काला धन बाहर निकल रहा है। वे सबेरे पांच-छह हजार के फुटकर लेकर बैठते है और दो-तीन ग्राहक दो-दो सौ रुपये की दवा खरीदने के लिए आ जाते हैं। नोट दो-दो हजार का थमाते हैं जिससे उनका छुटटा करने में ही पूरा फुटकर खत्म हो जाता है। इतनी बिक्री में तो घर चलने वाला नही है और फिर कुछ ही देर में वापसी के लिए पैसा खत्म हो जाने पर दुकान खोले रखकर उन्हें ऊबने को मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने व्यंग में कहा कि उनका काम दुकान चलाना है या दुकान पर बैठे-बैठे खंजरी बजाना। केके गहोई की देखा देखी उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय नेता सत्यपाल शर्मा भी उखड़ पड़े। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बैंकों में कई दिन हो जाने के बावजूद पैसा नही पहुंच रहा है जिससे झगड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि नोट बंदी से काला धन रखने वालों का तो कुछ नही बिगड़ा लेकिन जनता खून के आंसू पीने को मजबूर हो रही है।
गरमा-गरमी ज्यादा बढ़ने पर डीएम चर्चा का रुख डायवर्ट करने के लिए तत्पर हुई। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बैंकों में आज शाम तक ही पर्याप्त कैश पहुंच जायेगा। व्यवस्था को सुचारू रखने का आश्वासन उन्होंने लोगों को दिया।

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