0 मंगलवार को लिया था गल्ला व्यापारी समिति ने मंडी खोलने का फैसला
0 नोटबंदी के कारण रुपया नहीं होने के कारण फैसले से नाइत्तेफाकी जताई व्यापारियों ने
कोंच-उरई। गुरुवार से गल्ला मंडी खोलने और व्यापार कार्य शुरू करने का गल्ला व्यापारी समिति का फैसला परवान नहीं चढ सका, समिति द्वारा गल्ला मंडी खोलने के फैसले के बाहर जाते हुय व्यापारियों नेे कारोबार बंद रखने का फिर से ऐलान कर दिया। इस तरह मंडी खुलने से पहले ही फिर बंद हो गई और किसानों के हाथ एक बार फिर मायूसी लगी। समिति के अध्यक्ष ने इस पर अपनी सफाई देते हुये कहा कि गल्ला व्यापारियों का निर्णय ही सर्वोपरि है, यदि वे मंडी बंद रखना चाहते हैं तो मंडी बंद ही है।
गुजरी 8 नवंबर को मोदी सरकार द्वारा हजार पांच सौ के नोटों को चलन के बाहर कर देने के फैसले के बाद गल्ला कारोबार पर बहुत ही बुरा असर पड़ा और करेंसी का फ्लो रुक जाने के कारण गल्ला व्यापारी समिति को अनिश्चित काल के लिये गल्ला व्यवसाय बंद करने का फैसला लेना पड़ा था। नोटबंदी के फरमान से प्रभावित गल्ला कारोबार 13 नवंबर से बंद कर दिया गया था जिसके चलते जहां एक तरफ मंडी राजस्व का अब तक लाखों का नुकसान हो चुका है तो वहीं दूसरी तरफ किसान और मंडी में दिहाड़ी पर काम करने वाले पल्लेदारों की भी मुसीबतें बढी हुई हैं और परिवार का पेट भरने के लिये वे वैकल्पिक व्यवस्थायें तलाशने को मजबूर हैं। मंगलवार को गल्ला व्यापारी समिति के अध्यक्ष अजय गोयल और मंत्री धु्रवप्रताप सिंह के हस्ताक्षर से जारी प्रेस नोट में गुरुवार से गल्ला मंडी की बंदी बापिस लेने की बात कही गई थी लेकिन आज जब गल्ला मंडी में आम व्यापारी पहुंचे तो उन्होंने बंदी बापिसी के फैसले को मानने से साफ इंकार कर दिया। साफ है गल्ला मंडी खुलने से पहले ही दोबारा फिर अनिश्चित काल के लिये बंद हो गई। गल्ला व्यापारी मिथलेश गुप्ता, नवनीत गुप्ता, छोटे अग्रवाल, विनय अग्रवाल, बबलू अग्रवाल, अंशुल मिश्रा, विपिन अग्रवाल, छोटू तिवारी, राममोहन लोहिया, श्रीकांत पटेल, जय अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल, विजय गुप्ता, महेश शंकर लोहिया, जीतू राठौर, राहुल तिवारी, अजय रावत, छुन्ना धनौरा, रामराजा पटेल, राजीव पटेल, सतीश राठौर आदि का कहना है कि मंडी खोलने का कोई औचित्य तब तक नहीं है जब तक कि करेंसी का प्रवाह पटरी पर नहीं आ जाता है। किसान अपना माल बेचेगा तो उसे भुगतान भी करना पड़ेगा लेकिन बैंक शाखायें भुगतान दे नहीं पा रहीं हैं, ऐसी स्थिति में सिवाय परेशानी के और कुछ हाथ नहीं आने बाला है। हालांकि आज मंडी में थोड़ा बहुत माल आया भी था लेकिन बंदी बहाल रखने के निर्णय के बाद उसकी नीलामी नहीं हो सकी और आढतिया को वह माल गोदामों में रखना पड़ा।
व्यापारी यदि बंदी में राजी हैं तो मंडी बंद है
मंडी बंदी को लेकर बदली परिस्थितियों में गल्ला व्यापारी समिति को भी व्यापारियों की हां में हां मिलानी पड़ी है, समिति के अध्यक्ष अजय गोयल का कहना है कि मंडी खोलने का उनका फैसला व्यापारियों और किसानों के हितों को लेकर था क्योंकि व्यापार ठप होने के कारण जहां आढ़तियों के सामने आर्थिक संकट की स्थितियां बनती जा रही है वहीं किसानों को भी अपनी उपज बेचने से वंचित होना पड़ रहा था। अब अगर व्यापारी बंदी में ही राजी हैं तो मंडी तब तक बंद ही है जब तक कि व्यापारी नहीं चाहेंगे।
फोटो–अजय गोयल






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