28orai05उरई। कलेक्ट्रेट में तीन दिन से भूख हड़ताल पर बैठे आधा दर्जन से अधिक आदर्श लोक शिक्षा प्रेरकों की हालत बिगड़ जाने से अधिकारियों में खलबली मच गई। एबुंलेंस बुलवाकर सभी कर्मचारियों को जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां उपचार के बावजूद उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
लोक शिक्षा प्रेरक विभिन्न मांगों को लेकर 13 दिन से हड़ताल का क्रम चला रहे हैं। शनिवार को उन्होंने धरने को प्रभावी रूप देने के लिए भूख हड़ताल शुरू करने का फैसला किया। तीन दिन से 14 प्रेरक भूख हड़ताल पर डटे हुए थे। जिनमें से आठ की हालत आज बिगड़ गई। कलेक्ट्रेट स्थित दफ्तरों में लोक शिक्षा प्रेरकों के बीमार पड़ जाने की खबर से अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गये। अस्पताल में भर्ती कराये गये प्रेरकों में कल्पना भारती पिपरायां, सुनीता मदनेपुर, नीलू बाथम रूरा मल्लू, जीवन ज्योति नवींपुर, प्रियंका राजपूत कदौरा, अर्चना निरंजन भेंड़, अमित पचैरी तबा और अभय कुमार बार शामिल हैं। डाक्टरों के मुताबिक इनकी हालत संगीन है। उधर जिला बेसिक शिक्षाधिकारी प्रदीप पांडेय पे्ररकों की हड़ताल के बबाल से घबराकर लखनऊ पलायन कर गये। उन्होंने कार्यभार नगर शिक्षाधिकारी गनपत लाल को सौंप दिया था। जिनका कहना है कि लोक शिक्षा प्रेरकों की मांगों के बारे में उन्हें अभी तक कोई जानकारी नही है। उन्होंने संबंधित बाबू से जानकारी करने के लिए इस संवाददाता को भेज दिया। बाबू ने बताया कि शासन तो योजनायें चला देती है लेकिन मानदेय का बजट भेजना शासन भूल जाता है, अब बीएसए और नगर शिक्षाधिकारी अपनी गांठ से शिक्षा प्रेरकों की फौज को वेतन देने से रहे। पाठ्य पुस्तक भी शासन से बजट न आने की वजह से ही वितरित नही हो पा रही हैं। बाबू का कहना था कि अगर लोक शिक्षा प्रेरक जिले में खुरखुद करने की बजाये लखनऊ में जाकर सरकार से अपनी बात सुनाते तो हो सकता है तो उनको राहत मिल जाती। नियुक्तियों में अनियमितता के आरोपों को उन्होंने लफ्फाजी बताया। उन्होंने कहा कि प्रेरकों के ऐसे कर्मों की वजह से ही उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है लेकिन विभाग उनके साथ संवेदनशील है और उनकी तमाम हठधर्मिता के बावजूद उनको अधिकतम सहूलियत देने की कोशिश कर रहा है।

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