रोज की तरह खुले सभी बाजार, लोगों ने नहीं कान दिये बंदी के आह्वान पर
कोंच-उरई। मोदी के हजार पांच सौ की करेंसी पर प्रतिबंध लगाये जाने से परेशान मोदी विरोधियों को आज एक और बड़ा झटका लगा है, बाजार बंदी का आह्वड्ढान पूरी तरह विफल रहा है और यहां के सभी बाजार आम दिनों की ही तरह खुले। हालांकि बाजारों में रौनक न के बराबर है लेकिन दुकानदार अपनी दुकानें बंद करने को कतई राजी नहीं दिखे। बाजार बंदी यहां इसलिये भी बेअसर रही कि जिन दलों ने बंदी का आह्वड्ढान किया था उनका यहां कोई बजूद ही नहीं है और जिन दलों का बजूद है वे बंदी के फैसले से अलग रहे।
नोटबंदी पर हालांकि समूचा विपक्ष संसद के बाहर एकजुट दिखा लेकिन भारत बंदी के आह्वन से कईयों ने अपने को अलग कर लिया था। जो दल भारत बंदी से विलग रहे उन्हीं का थोड़ा बहुत यहां बजूद है। न ही कांग्रेस और न सपा-बसपा बंदी को लेकर उत्साहित थे सो यहां के दुकानदारों ने धड़ल्ले से अपने प्रतिष्ठान आम दिनों की ही भांति खोले। आम दिनचर्या बिल्कुल सामान्य रही, ऐसा लग रहा था जैसे बंदी के आह्वान के बारे में यहां के दुकानदार पूरी तरह से अनभिज्ञ हों। बाजारों में चिपके पोस्टर और टंगे बैनर मोदी को बधाई देते दिखे, ऐसा लगा जैसे आज खासतौर पर बंदी के खिलाफ दुकानदारों ने जानबूझ कर अपनी दुकानें खोली हों। मणिहार बाजार के दुकानदारों संतोष पटवा, नवनीत पाटकार, मनीष पाटकार, कमलेश पाटकार, क्रांति, नीलू वैद, सुमित रिछारिया, सुनील पटवा, अजय पाटकार, अनिल अग्रवाल, गोलू बंसल, दीनदयाल सोनी, अशोक टेलर, दीपू सक्सेना, जितेन्द्र श्रीवास्तव आदि ने तो बाकायदा बैनर टांग कर मोदी के हमकदम होने का दम भरा और ग्राहकों का स्वागत सौंफ सुपाड़ी खिला कर किया।
बंदी को नहीं माना सर्राफा कारोबारियों ने
भारत बंद के आह्वान को दरकिनार करते हुये यहां सर्राफा बाजार भी आम दिनों की तरह ही खुला। हालांकि अभी तक स्वर्ण कारोबारियों को लेकर कोई नीति स्पष्ट नहीं होने के कारण सर्राफा कारोबारी थोड़ा असहज महसूस कर रहे हैं लेकिन वे नोटबंदी के मोदी के फैसले को गलत भी नहीं मानते हैं। सर्राफा कमेटी के अध्यक्ष रामकपूर कहते हैं कि बाजार बंदी किसी समस्या का हल नहीं है और इस तरह के आह्वान राजनीति चमकाने का हिस्सा हो सकते हैं लेकिन इससे आम व्यवसायी का कोई फायदा नहीं है।
मोदी के करेंसी में बदलाव के फैसले को स्वीकारना ही होगा
नोटबंदी के बाद यद्यपि बाजारों में रौनक नहीं है और सभी तरह के बड़े व्यापार लगभग ठप से ही पड़े हैं लेकिन इसके बाबजूद दुकानें आम दिनों की तरह आज भी न केवल खुली दिखीं बल्कि लोग मोदी के समर्थन में खड़े भी दिखे। कपड़ा व्यापारी कल्याण समिति के रामप्रकाश इकडया का कहना है कि काला धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी की मुहिम का हिस्सा होने के कारण लोगों को नोटबंदी के फैसले को स्वीकारना ही होगा तभी आम जिंदगी और व्यवसाय पटरी पर चल सकेंगे।







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