cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। माधौगढ़ ब्लाॅक के जमरेही सानी गांव में कोटेदार कुंजबिहारी के खिलाफ ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए उच्च स्तर तक शिकायतें भेजी थी लेकिन सारी शिकायतें जांच के लिए पूर्ति निरीक्षक को आती हैं जिनका जमीर कोटेदार के यहां गिरवी बताया जाता है इसलिए कोटेदार पर फंदा कसें तो कसें कैसे।
केंद्र और राज्य सरकार बहुसंख्यक होने के कारण गरीबों के लिए लुभावनी योजनायें चलाकर उनका दिल जीतने की होड़ में जुटीं हैं लेकिन सरकारी तंत्र की करामात की वजह से इसका असर उल्टा हो रहा है। पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ न मिलना सरकार के प्रति गुस्से के भड़कने का सबब बनता जा रहा है।
माधौगढ़ ब्लाॅक के जमरेही सानी के कोटेदार के मामले में भी नजारा कुछ इसी तरह का है। इस गांव के निवासी पत्रकार युसुफ खान ने उन 70 कार्ड धारकों की लिस्ट भेजी थी जिनको कोटेदार कुंजबिहारी ने जनवरी से जून तक कोई सामग्री नही दी थी। पात्र गृहस्थियों को निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत में सामग्री देने की शिकायत भी सप्रमाण उनकी शिकायत में नत्थी थी लेकिन हुआ क्या। ऊपर तक भेजी गई शिकायतें क्षेत्र के डकैत की उपाधि से सुशोभित किये जा रहे पूर्ति निरीक्षक अमोल सिंह चैहान के पास जांच के लिए भेज दी गई जिन्होंने सभी को रफादफा कर कोटेदार को क्लीन चिट दे दी। हालांकि इससे वास्तविकता तो बदल नही सकती।
युसुफ खान का दावा है कि अमोल सिंह चैहान एक भी दिन गांव में कार्ड धारकों के बयान लेने नही आये। उन्होंने कोटेदार कुंजबिहारी ने जो डिक्टेट किया उसी पर रिपोर्ट बना दी। युसुफ खान का कहना है कि अगर क्रास जांच कराई जायें यानि किसी दूसरे विभाग के अधिकारी को मौके आरोपों का सत्यापन करने के लिए भेजा जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो जायेगा। क्या उच्चाधिकारी इस बात से तैयार हैं।

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