कोंच-उरई। आज ही के दिन 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा ध्वंस की तिथि अब शायद लोगों के जेहन से उतर गई है और समय का तेज रफ्तार पहिया अपनी गति से दौड़ रहा है। लोगों में इस तिथि को लेकर किसी तरह की चर्चायें भी अब नहीं होती हैं, प्रशासन भी अब इस ओर से पूरी तरह बेखबर है और बस अड्डों या रेलवे स्टेशनों पर किसी तरह की चौकसी बरतने की भी जरूरत नहीं महसूस की गई, अलबत्ता बतौर औपचारिकता ओलमा कौंसिल ने जरूर काली पट्टी बांध कर अपना विरोध जताते हुये इसे काला दिवस बताया।

पार्टी कार्यकर्ताओं ने बाहों पर काली पट्टी बांध कर राष्टपति को संबोधित एक ज्ञापन तहसीलदार भूपाल सिंह को दिया जिसमें कहा गया कि आज के दिन भारतीय संविधान की धज्जियां उड़ाते हुये तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेताओं एवं शासन प्रशासन की मिली भगत से संघ परिवार ने बाबरी मस्जिद को शहीद कर दिया। इस घटना के चौबीस बर्ष बीत जाने के बाद भी न्याय नहीं हो सका। कार्यकर्ताओं ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि इस मामले में अविलंब कार्यवाही करे। इस दौरान पप्पू मोंठ, अब्दुल मजीद, इकबालउलहक, अरुण दुवे, हाफिज रिजवान, गुड्डू अंसारी, इरफान अब्बासी आदि मौजूद रहे।






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