कोंच-उरई। पिछले चौबीस दिनों से गल्ला मंडी में ठप रहा व्यवसाय मंडी खुलने के बाद धीरे धीरे पटरी पर लौट रहा है। हालांकि अभी व्यापार कार्य को पटरी पर आने में महीने-दो महीने का वक्त और लग सकता है क्योंकि व्यापारियों के पास नकदी नहीं होने की बड़ी समस्या अभी भी मुंह बाये खड़ी है, लेकिन इससे पल्लेदारों और किसानों को थोड़ी बहुत राहत जरूर मिलेगी और उनका काम चल निकलेगा।

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व्यापारियों की समस्या अभी भी जस की तस है कि छोटे छोटे किसान अपना बहुत थोड़ा माल लेकर मंडी आते हैं तो उनके सामने नकदी न होने के कारण भुगतान की समस्या आती है। हालांकि किसान भी यह बात भली भांति समझ चुका है कि नई परिस्थितियों में नोटबंदी के बाद और मोदी के कैशलेस ट्रांजिक्शन के आह्वïान के बाद भुगतान चेक या डिजिटल ही लेना होगा।
8 नवंबर को पीएम मोदी द्वारा नोटबंदी किये जाने के बाद से ही व्यापारी बिन पानी मीन जैसी हालत में हैं और व्यापार कार्य में आ रही अड़चनों के बाद गल्ला व्यापारियों ने मंडी बंदी की घोषणा करके चौबीस दिनों तक गल्ला व्यवसाय से तौबा किये रखी। यद्यपि अभी भी समस्या जस की तस है और व्यापारियों के हाथों में नकदी नहीं है लेकिन कब तक व्यापार कार्य बंद रखा जा सकता है की सोच कर उन्होंने गुजरे कल सोमवार से मंडी खोल दी है जिसके बाद धीरे धीरे वहां रौनक लौटने के आसार बनते दिखाई देने लगे हैं।

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सोमवार को लगभग सौ बोरे की आवक के बाद आज दूसरे दिन भी लगभग ढाई-तीन सौ बोरे की आवक दर्ज की गई जो इस बात का संकेत है कि मंडी फिर से गुलजार होने की राह पर बढी तो है लेकिन पूरी तरह से व्यापार पटरी पर लौटने में अभी काफी वक्त लग सकता है। मंडी में कुछ व्यापारियों से जब बात की गई तो उन्होंने समस्या के निदान की दिशा में किसी तरह की प्रगति नहीं होने की बात कहते हुये बताया कि अव्वल तो बैंकों से पचास हजार रुपये प्रति सप्ताह रकम निकासी की सीमा ऊंट के मुंह में जीरे के समान है क्योंकि सप्ताहांत में इतना भुगतान तो मजदूरों को ही चला जाता है, दूसरे बिना कैश के व्यापार करना लगभग असंभव सा है। बैंकों से करंट अकाउंट पर कम से कम पचास हजार रुपया प्रतिदिन निकासी के यदि आदेश दिये जायें तो बात कुछ बन सकती है।
करंट खातों से निकासी की सीमा बढाई जायेgalla-3
कोंच। गल्ला मंडी यद्यपि खुल तो गई है लेकिन व्यापार किस दिशा में जायेगा, इसको लेकर अभी भी व्यापारिक संगठनों में अंदेशा है। गल्ला व्यापारी समिति के अध्यक्ष अजय गोयल कहते हैं कोंच बुंदेलखंड की पिछड़े इलाके की मंडी है जहां सारा कारोबार कैश पर आधारित है और जब किसानों से डिजिटल ट्रांजिक्शन या चेक से भुगतान की बात की जाती है तो वे मुंह बाये दिखने लगते हैं जैसे कोई अजूबी बात कह दी हो। उनका मानना है कि करंट अकाउंट बालों को कम से कम प्रतिदिन पचास हजार की निकासी की सुविधा मिल जाये तो कुछ बात बन सकती है।
फिलहाल चेक से भुगतान का ही एकमात्र विकल्प है
galla-4कोंच। थोक गल्ला-मैंथा व्यापारी कल्याण समिति के अध्यक्ष अजय रावत भी मौजूदा हालातों को व्यापार कार्य के लिये कठिन समय बता रहे हैं। उनका कहना है कि गल्ला और मैंथा के व्यापार में दसियों लाख रोजाना का अर्न ओवर होता है लेकिन नोटबंदी के बाद से जैसे व्यापार कार्य को ग्रहण सा लग गया है। हालांकि व्यापारियों के पास कच्चे आढतियों और किसानों को चेक से भुगतान करने का स्पष्टï विकल्प है लेकिन व्यवहारिक दृष्टिïकोण से यह स्थितियां व्यापारियों के लिये ही नहीं अपितु किसानों के भी माफिक नहीं हैं। वे भी करंट अकाउंट पर पचास हजार रोजाना भुगतान दिये जाने के हामी हैं।
नकदी के बिना कैसे काम चलेगा
gall5कोंच। किसानों के लिये भी नोटबंदी किसी आफत से कम नहीं है, चौबीस दिन बाद जैसे तैसे मंडी खुली भी तो किसानों के हाथ में नकद पैसा नहीं आ रहा है। खेड़ा के किसान अरविंद निरंजन आज मंडी में अपना माल लेकर आये थे लेकिन कोई भी व्यापारी नकद भुगतान नहीं दे पाया जिसके चलते वे काफी मायूस दिखे। उन्होंने बताया कि घर चलाने के लिये नकदी की जरूरत है लेकिन व्यापारी चेक से भुगतान की बात कर रहे हैं। अब ये तो वही कहावत हुई कि आसमान से गिरे, खजूर में अटके। यानी फिर से नकदी के लिये बैंक में कतार लगाने की नौबत बनती दिख रही है।


चेक से भुगतान लेने में कोई बुराई नहीं
galla-6कोंच। नोटबंदी में नकदी की किल्लत को देखते हुये ऐसे किसान भी हैं जिनको चेक से भुगतान लेने में कोई गुरेज नहीं है। पिंडारी के किसान वीरसिंह अपना माल लेकर कोंच मंडी में आये थे और आढतिया ने उन्हें भुगतान में चेक थमा दिया और उन्होंने भी बिना किसी नानुकुर के उसे स्वीकार करते हुये कहा कि वह संतुष्टï हैं और अब नई परिस्थितियों से समझौता करने के अलावा कोई और विकल्प है भी नहीं। जिस ओर व्यवस्था जा रही है उसमें चेक और कैशलेस व्यवस्था को अपनाना ही होगा।

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