उरई। पिंडारी स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य का आत्मघाती साहस लोगों को चैंका सकता है। हाईकोर्ट के आदेश के सामने प्रदेश भर में डीएम और पुलिस कप्तानों तक की घिग्घी बंध रही है लेकिन आप जनाब है कि हाईकोर्ट के आदेश की काॅपी लेकर पहुंचे बीटीसी प्रवेशार्थियों को उन्होंने एक-एक करके खरी-खोटी सुनाई और माननीय हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने की बजाय उन्हें चलता कर दिया। अब देखना यह है कि इस गुस्ताखी के चलते कहीं उन्हें कृष्ण जन्मभूमि को देखने की नौबत न आ जाये।
2015 के बीटीसी परीक्षार्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जिस पर माननीय हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में आदेश कर दिया था। रमा, बीना, अर्चना, दीपिका आदि प्रवेशार्थियों ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति डायट में 5 दिसंबर को उनके द्वारा रिसीव करा दी गई थी लेकिन फिर भी उनका प्रवेश नही कराया गया। इसके बाद 8 दिसंबर को साढ़े 9 बजे उन्हें अगले दिन डायट में उपस्थित होने का एसएमएस प्राप्त हुआ जिस पर वे लोग अगले दिन सजधज कर 10 बजे सुबह पिंडारी जा पहुंचे लेकिन डायट में उनको एक भी कर्मचारी उपस्थित नही मिला जिससे उनको बैरंग लौटना पड़ा।
ज्बकि इसके एक दिन पहले जब वे डायट पहुंचे थे तो प्राचार्य की ओर से एक-एक कैंडीडेट को तलब करवा कर अभद्र भाषा के साथ धमकाया गया। साफ है कि प्राचार्य हाईकोर्ट की हुकुमउदूली पर आमादा हैं। जिलाधिकारी के नाम संबोधित इसका ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को देते हुए प्रवेशार्थियों ने कहा कि लगता है कि प्राचार्य को हाईकोर्ट के कुपित होने के अंजाम का एहसास नही है। कहीं हाईकोर्ट उनके इस रुख की जानकारी के बाद अपनी त्यौरी कड़ी न कर ले। वे लोग प्राचार्य के हित में उनके लिए रहम की दुआ कर रहे हैं।






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