उरई। कामरेड सुदर्शन बाथम वामपंथ की क्रांतिकारी धारा की रोशनी थे उन्होंने सादगी से जीवन बिताते हुए कभी सिद्धांतों से समझौता नही किया। भाकपा माले के होल टाइमर रहते हुए उन्होंने पार्टी साहित्य को जन-जन तक पहुंचाया। यह विचार इप्टा उरई के अध्यक्ष का. देवेन्द्र शुक्ला ने व्यक्त किए। वह सोमवार को मोक्षधाम पर का. बाथम के अंतिम संस्कार स्थल पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे।
इप्टा के महासचिव राजपप्पन ने कहा कि बाथम सच्चे अर्थो में क्रांतिकारी थे उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मेहनतकश गरीब जनता के संघर्ष में सपर्पित कर दिया। इप्टा सचिव संजीव ने बाथम को वामपंथ की क्रांतिकारी धारा को सच्चा जुझारू सिपाही बताया। प्रगतिशील लेखल संघ के अध्यक्ष डा. बाबूरामाधाीन ने कहा कि सुदर्शन बाथम जैसे क्रांतिकारी को लोगों की सहायता की आवश्यकता होती है।
भाकपा माले के जिला सचिव राजीव कुमार कुशवाहा ने कहा कि का. बाथम के निधन से पार्टी को अपूर्णीय क्षति हुई है। सतीश चंद्र शर्मा ने का. बाथम को मानवता के कल्याण के प्रति समर्पित संत बताया। भाकपा के जिला सचिव का. कमलाकांत ने कहा कि सुदर्शन बाथम आईपीएफ के समय पार्टी में आए और वह भाकपा माले के संस्थापक सदस्य थे। शोकसभा को का. काशीराम, का. हरीशंकर याज्ञिक, गिरधर खरे, हरीशंकर वर्मा आदि ने संबोधित किया। इस अवसर पर मनीष यादव, अशोक दोहरे, धनीराम, धर्मेन्द्र, अवधेश शर्मा, कम्बोद सिंह राना, सहित सैकड़ों की संख्या में वामपंथी नेता एवं बाथम के परिजन मौजूद रहे।






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