0 तीन दिन की बंदी के बाद बैंक शाखाओं के बाहर फिर लगी कतारें
konch2कोंच-उरई। नोटबंदी के छत्तीस दिन बाद भी आम जनता का पुरसा हाल नहीं है, लोग अभी भी करेंसी की किल्लत से जूझ रहे हैं और बैंक शाखाओं के बाहर की कतारें अभी भी खत्म नहीं हो सकी हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत तो इस बात की है कि सरकार ने नोट निकासी की जो लिमिट बनाई है उसके सापेक्ष काफी कम भुगतान लोगों को मिल पा रहा है। अधिकतर बैंक शाखायें जिनमें सहकारी बैंकों के अलावा ग्रामीण बैंक शामिल हैं, अपने ग्राहकों को केवल दो हजार का भुगतान ही दे पा रहे हैं जिसके चलते लोगों की मुश्किलें बढी हैं। एसबीआई और प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में अपेक्षाकृत कुछ ज्यादा ग्राहकों को मिल रहा है लेकिन अपनी आजीविका चलाने के लिये लोगों के लिये यह रकम नाकाफी है।
मोदी के नोटबंदी के फैसले के बाद से लोगों की जिंदगी पटरी के नीचे ऐसी उतरी है कि लाख कोशिशों के बाद भी वापिस पटरी पर नहीं लौट पा रही है। आज बैंकों की तीन दिनी बंदी के बाद जब बैंक खुले तो लोगों की भीड़ कैश लेने के लिये उमड़ पड़ी। बैंक शाखाओं के बाहर लगी लंबी लंबी कतारें इस बात की चुगली साफ करती दिखी कि व्यवस्था बेहाल है। इलाहाबाद बैंक और ग्रामीण बैंक दो हजार देकर ग्राहकों को टरकाने में लगे हैं जबकि एसबीआई जरूर चैबीस हजार के भुगतान कर पा रही है, अलबत्ता प्राइवेट सेक्टर के पीएनबी सरीखे बैंक भी दस हजार के भुगतान पर उतर आये हैं। इसके इतर एटीएम महज दो हजार ही उगल पा रहे हैं। ऐसे में किस तरह से जिंदगी की गाड़ी चले, लोगों के सामने बड़ा यक्ष प्रश्न मुंह बाये खड़ा है। हालांकि सहालग लगभग निपट चुकी है और उल्टा सीधा करके लोगों ने अपनी बेटियों के हाथ पीले कर पाये हैं, लेकिन लोगों को इन कामों के अलावा भी कैश की जरूरत है और कैश है कि बैंकों में है नहीं। यह स्थिति और कितने रह पाती है, यह देखना बाकई इस परिप्रेक्ष्य में दिलचस्प होगा जब पीएम ने लोगों से पचास दिन की मोहलत व्यवस्था सुचारु करने के लिये मांगी थी।
आये थे चैबीस हजार लेने, थमा दिये दस हजार
konch3कस्बे के आराजी लेन निवासी चैधरी अख्तर को उस वक्त काफी कोफ्त हुई जब बैंक काउंटर पर उन्हें महज दस हजार देकर हाथ जोड़ लिये गये। पीएनबी के बाहर कतार में खड़े चैधरी का कहना है कि कल निपटे त्योहार के लिये इधर उधर से जुगाड़ करके किसी तरह काम चला लिया था इस उम्मीद पर कि मंगलवार को बैंक खुलने के बाद उन्हें चैबीस हजार भुगतान मिल जायेगा जिससे लोगों की देनदारी निपट जायेगी लेकिन ऐसा हो नहीं सका। बैंक ने कैश कम होने का रोना रोते हुये मात्र दस हजार ही दिये।

क्या करें, केवल दो हजार उगले एटीएम ने
konch4चेक या विड्राल से भुगतान लेने बालों की लंबी लाइन देख कर भड़ारी निवासी रामानंद पटेल को पसीने छूअ गये, उन्हें भी चैबीस हजार का भुगतान निकालना था लेकिन उन्होंने ऐन वक्त पर अपना इरादा बदल दिया और वह अपेक्षाकृत छोटी एटीएम की लाइन में लग गये। उनका कहना था कि पूरा दिन बर्बाद करने के बाद भी उन्हें मात्र दस हजार ही मिल पाने थे जिससे उनका कोई काम नहीं चलने बाला था लिहाजा उन्होंने फिलहाल एटीएम से दो हजार निकाल कर ही अपना काम ले देकर चला लिया।

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