15_dec2016-1उरई। जनपद के बुद्धिजीवियों मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर किसानों की फसलों को आवारा पशुओं से बचाने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि आवारा पशुओं के द्वारा किसानोें की फसलों को तबाह किया जा रहा है इसके बाद भी किसानों की फसलों को बचाने के लिए प्रशासन के द्वारा अब तक कोई भी कारगर कदम नही उठाए गए है।
जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन को भेजे गए ज्ञापन में पूर्वमंत्री अकबर अली, जिला अधिवक्ता संघ जनपद जालौन के महासचिव ब्रजबिहारी गुप्ता, अधिवक्ता संघ के कोषाध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता रामसिया प्रजापति, देवेन्द्र कुमार दूरवार, महेन्द्र विक्रम सिंह, अनुराग सिंह सेंगर, राजेश कुमार, जयराम गौतम, कृष्णबिहारी पाल, राजकिशोर गौतम, धर्मेन्द्र कुमार, राजेश कुमार प्रजापति, सुरेश चंद्र,राजा सिंह यादव, मंगलेश तिवारी, भारत सिंह कुशवाहा, प्रदीप दीक्षित, रामप्रकाश पाल, केशव प्रसाद प्रजापति आदि तमाम बुद्धिजीवियों ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुए अवगत कराया कि बुंदेलखंड का किसान भयंकर एवं गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। बुंदेलखंड के प्रत्येक जिले में लाखों की संख्या में दिन रात भोजन की तलाश में आवारा पशुओं द्वारा किसानों की फसलों को तबाह किया जा रहा है। आवारा घूम रहे गौवंशीय पशुओं से किसानों की फसलों को बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाए। गत वर्ष 2014-15 और 2015-16 में दैवीय आपदा, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, सूखा राहत के नाम पर बड़े पैमाने पर राहत सामग्री के वितरण मे ंधांधली की गई है जिसकी जांच कराई जाए और दोषी लोगों को जेल भेजा जाए तथा राहत राशि से छूटे लोगों को उनका हक दिलाया जाए। फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों के खेतों की बैरीकेटिंग सरकारी खर्चे पर कराई जाए या फिर पंद्रह हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब को प्रत्येक किसान को बैरीकेडिंग के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाए। सामुदायिक नलकूपों को विद्युत शुल्क से किसानों को मुक्त कराया जाए साथ ही किसानों के एक लाख तक के कर्जे माफ किए जाए। कृषि मशीनरी को क्रय करने के लिए किसानों को बगैर ब्याज के लोन उपलब्ध कराई जाए सभी किस्म के छोटे बड़े किसानों को एक हजार प्रति माह पेंशन दिलाई जाए। उक्त बुद्धिजीवियों ने किसानों की जुलंत समस्याओं को गंभीरता से लेकर आगामी विधान सभा चुनाव के पहले निस्तारण करने की मांग की है साथ चेतावनी दी है कि अगर एक सप्ताह में उक्त समस्याओं का निराकरण नही होता है तो बुंदेलखंड के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर अन्ना पशुओं को घेराव कर उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

Leave a comment