0 गायें हांक कर ला रहे ग्रामीणों को पुलिस ने ठोंका
0 एक गांव से दूसरे गांव की सीमा में गायें घुसा रहे ग्रामीणों की ग्रामीणों से भिड़ंत
कोंच-उरई। बुंदेलखंड में खेती किसानी के लिये अभिशाप बन चुकी अन्ना प्रथा अब बबालों को भी जन्म देने बाली साबित हो रही है। बीती रात पचीपुरा गांव के दर्जनों ग्रामीणों की पुलिस से उस वक्त भिडं़त हो गई जब वे गांव से गायें हांक कर कोंच की सीमा में ला रहे थे। पुलिस ने डंडाबाजी कर कुछ लोगों को हिरासत में लिया था जिसे लेकर उत्तेजित ग्रामीणों ने कोतवाली में घेरा डाल दिया था और अंततरू पुलिस को उन लोगों को छोडना पड़ा। दूसरी घटना इसके ठीक बाद की है, भेंड़ के कुछ लोग अपने मौजे से गायें हांक कर छानी मौजे में छोडने जा रहे थे जिसे लेकर दोनों गांवों के लोग भिड़ गये और लट्ठम लट्ठ हो गई।
यूपी का बुंदेलखंड कई मायनों में राष्ट्रीय पटल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिये जाना जाता है जिसमें एक अन्ना प्रथा भी है। इस मसले को लेकर इसी सत्र के दौरान इलाकाई सांसद भानुप्रताप वर्मा ने भी संसद में अपनी बात रखी थी। यह मुद्दा इतना जबर्दस्त है कि अब यह बबालों को भी जन्म देने लगा है। खेतों में फसलें खड़ी हैं और सैकड़ों की संख्या में अन्ना जानवर जिनमें ज्यादातर गायें और बछड़े शामिल हैं, इन खेतों में घुस कर फसलें चैपट करने में लगे हैं। किसानों की रातों की नींद उड़ी हुई है और वे रात रात भर खेतों पर पहरेदारी करने के लिये मजबूर हैं। बात बीती शाम की है जब पचीपुरा गांव में पहुंचा अन्ना जानवरों का झंड देख गांव बाले परेशान हो गये लिहाजा कुछ लोगों ने मवेशियों को हांकना शुरू किया और कोंच की सरहद तक ले आये। इसी बीच कोतवाली पुलिस की पेट्रोलिंग पार्टी वहां से गुजरी तो ग्रामीण पुलिस देखकर भाग खड़े हुये। पुलिस ने दौड़ा कर तीन लोगों को पकड़ कर उनकी ठुकाई कर दी और कोतवाली ले आई। पुलिस ने गायें फिर पचीपुरा-भेंड़ की ओर कर दिया। इसकी सूचना जब पचीपुरा पहुंची तो सैकड़ों ग्रामीणों ने कोतवाली के गिर्द घेरा डाल दिया और बबाल काटने लगे। अंततरू पुलिस को उन ग्रामीणों को छोडना पड़ा। दूसरी घटना इस घटना के ठीक बाद की है, भेंड़ गांव के ग्रामीणों ने वहां से अन्ना पशुओं को खदेड़ कर छानी मौजे में कर दिया। इधर, छानी बालों ने भेंड़ मौजे में जानवर लौटाये तो दोनों गांवों के लोगों के बीच लट्ठबाजी हो गई।






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