cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। बसपा से भाजपा में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए माधौगढ़ में संभावनायें टटोल रहे हैं। शुक्रवार को उन्होनंे गोपनीय रूप से जनपद में पहुंचकर इसके मददेनजर जायजा लिया।
भाजपा ने विधानसभा चुनाव जीतने की रणनीति का जो तानाबाना बुना है उस फार्मूले में प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में दो सीटें सवर्णों को और दो मध्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए तय की जा रही हैं। जबकि हर संसदीय क्षेत्र में एक सीट अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए वैसे ही आरक्षित होती है।
इस फार्मूले के तहत जालौन गरौठा भोगिनीपुर संसदीय क्षेत्र में अभी तक पार्टी की जो योजना है उसके मुताबिक कालपी और माधौगढ़ में जनरल कास्ट व भोगिनीपुर और गरौठा में बैकवर्ड उम्मीदवारों को खड़ा किया जाना है। पर माधौगढ़ सीट पर बसपा से आये हैवीवेट नेता स्वामी प्रसाद मौर्य का मन ललचा गया है। इस सीट से तीन बार कुशवाहा बिरादरी के विधायक चुने जा चुके हैं। हालांकि यह तभी संभव हुआ जब बसपा ने इस बिरादरी के उम्मीदवार खड़े किये। शिवराम कुशवाहा जैसे कददावर नेता को भी बसपा बदल कर जोर आजमाइश करना नही फल पाया और इस चक्कर में उन्हें अपने राजनैतिक कैरियर की बलि चढ़ानी पड़ी। लेकिन स्वामी प्रसाद मौर्य को शायद इस इतिहास की जानकारी नही है। भाजपा के स्थानीय नेता माधौगढ़ के लिए उनकी सक्रियता से चैकन्ना हो चुके हैं और हाईकमान को तथ्यों के साथ यह जानकारी भेजी जा रही है कि उनके दबाव में कोई इस तरह का फैसला लिया गया तो पार्टी के लिए यह कितना घातक सिद्ध होगा।

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