23orai02उरई। अपराधोें को नियंत्रित न कर पाने के आरोपों की बौछार झेल रही यूपी सरकार के लिए पुलिस विभाग में लूप लाइन माने जाने वाले अभियोजन विंग के महानिदेशक सूर्य कुमार सबसे कारगर ढाल बनकर उभरे हैं। इस पद पर डेढ़ वर्ष के अपने कार्यकाल में उन्होंने ऐसी कार्यनीति का अंजाम दिया जिससे बिहार की तरह यूपी में अपराधियों को सजा का प्रतिशत काफी बढ़ जाने के चलते कानून व्यवस्था पूर्ण रूप से पटरी पर आने की राह तैयार हो गई है।
सूर्य कुमार ने शुक्रवार को स्थानीय पुलिस लाइन में डीएम संदीप कौर और एसपी डाॅ. राकेश कुमार सिंह व अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में अपराध के शासकीय अधिवक्ताओं और थानों में तैनात पैरोकारों व मुहिर्ररों के साथ बैठक की। इसमें अभियोजन को प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण टिप्स दिये।
सूर्य कुमार ने बैठक में बताया कि पिछले डेढ़ वर्षों में प्रभावी अभियोजन की वजह से 50 हजार 2 सौ 21 मुजलिमों को सजा दिलाई गई। इनमें 3 हजार 3 सौ 63 को उम्र कैद और 8 हजार 6 सौ 21 लोगों को 10 साल से अधिक की सजा हुई है। खूंखार दस्यु गैंगों से पीड़ित अकेले चित्रकूट जिले में 9 अपराधियों को फांसी की सजा हो चुकी है। प्रदेश में यह एक कीर्तिमान है।
उन्होंने कहा कि गवाहों को सुरक्षा की आश्वस्ति के लिए जिलाधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित साक्षी सुरक्षा कार्ड विशेष मामलों में दिलाने की नई योजना लागू की गई है। उन्होंने वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी की देखरेख में सभी शाासकीय अधिवक्ताओं से उनकी परफोरमेंस का ब्यौरा लिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता अपराध मोती लाल पाल और भगवती तिवारी को उन्होंने सर्वाधिक सजा दिलाने का रिकार्ड उनके खाते में होने की वजह से प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया। इसके साथ ही अच्छी परफारमेंस के लिए पेशकारों को भी प्रशस्तिपत्र देकर उत्साहित किया।
अपराध पीड़ितों की मदद के लिए समाज कल्याण विभाग व विधिक सहायता प्राधिकरण के माध्यम् से संचालित हुई योजना की जानकारी दी और वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी से जिले में इसमें लाभांवित लोगों की संख्या का ब्यौरा लिया। उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा पीड़ितों को इस मामले में लाभ दिलाने की कोशिश की जानी चाहिए। उन्होंने डीएम से इसमें सहयोग करने की अपील भी की।
बैठक में अभियोजन अधिकारियों, शासकीय अधिवक्ताओं व पेशकारों से समस्याओं व सुझावों पर भी उन्होंने बात की। इसमें कई अछूते मुददे सामने आये। मसलन नये थाना भवनोें के डिजायन में मालखाने के लिए कमरा नही रखा गया है। एक पैरोकार ने जब इसकी जानकारी दी तो डीजी ने माना कि उनके लिए भी यह नई सूचना है। उन्होंने पुलिस मुख्यालय को डिजायन परिवर्तन के लिए लिखने का आश्वासन दिया।
बैठक में अपर पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र शाक्य, पुलिस उपाधीक्षक डाॅ. जंग बहादुर सिंह यादव, डीजीसी लखनलाल निरंजन, एडीजीसी मोती लाल पाल, भगवती प्रसाद तिवारी, संजीव गुर्जर आदि व वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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