02orai01उरई। अखिलेश यादव द्वारा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद नरेश उत्तम को प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने से समाजवादी पार्टी के जिले में शुभचिंतक बेहद उत्साहित हैं। उन्हें लगता है कि अखिलेश के इस कदम से भाजपा की ओर मुखातिब नजर आ रही जिले की कुर्मी कौम का रुझान समाजवादी पार्टी की ओर होगा जो कि पार्टी के लिए काफी प्लस रहेगा। उल्लेखनीय है कि जिले में कुर्मी बिरादरी अच्छी खासी संख्या में है और माधौगढ़ व उरई विधानसभा क्षेत्र में किसी पार्टी की हवा चुनाव में तय करने में यह बिरादरी अहम भूमिका अदा कर सकती है।
समाजवादी पार्टी ने जिले में विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत् ओबीसी जनाधार पर मुख्य रूप से निगाह जमा रखी है। माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र से कुशवाहा बिरादरी के लाखन सिंह कुशवाहा को इसी समीकरण के तहत उम्मीदवार बनाया गया था। कुशवाहा समाज से पहले भी दो बार जिले में विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। हालांकि इस बिरादरी के अपने जमाने के कददावर नेता शिवराम कुशवाहा को यह सफलता बीएसपी के टिकट पर हासिल हुई थी लेकिन यह बिरादरी इस बार बसपा के बेहद मुखालिफ है। इस कारण सपा के रणनीतिकार मानते हैं कि लाखन सिंह की उम्मीदवारी से तीनों विधानसभा क्षेत्रों में कुशवाहा बिरादरी सपा के साथ एकजुट होगी।
कुर्मी बिरादरी पर भी सपा काफी समय से निगाह गड़ाये हुए थी। रमा निरंजन को एमएलसी बनाने के पीछे इसी फैक्टर को ध्यान में रखते हुए बनायी रणनीति की सोच मानी गई थी। इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष सुमन निरंजन को पदासीन कराने में भी सपा के ही एक धड़े ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। फिर भी हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के नारों के बहाव में कुर्मी समाज बाहुल्य में भाजपा की ओर ही रुख करता नजर आ रहा था। लेकिन नरेश उत्तम के सपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद जिले में भी इस बिरादरी में राजनीतिक फिजा बदलने लगी है। समाजवादी पार्टी के खेमें के लोगों का मनोबल इससे जिले में चुनाव परिणामों को लेकर अचानक बुलंद महसूस किया जाने लगा है। गौरतलब है कि 2012 के विधानसभा चुनाव में उरई सदर सीट पर समाजवादी पार्टी का कोई अस्तित्व नजर नही आ रहा था लेकिन कुर्मी बिरादरी का दयाशंकर वर्मा का साथ देने की वजह से ही चुनावी बिसात पलट गई। जाहिर है कि दयाशंकर वर्मा के लोग सबसे ज्यादा कुर्मी बिरादरी के अपने साथ बने रहने की दुआ मांग रहे थे और नरेश उत्तम की प्रदेश अध्यक्ष पद पर ताजपोशी से सर्वाधिक ऊर्जा सपा में उनको मिली है। दूसरी ओर भाजपा के नेता और कार्यकर्ता सोमवार को लखनऊ में हुई मोदी की रैली में व्यस्त रहे। मंगलवार को जिले में वापसी के बाद भाजपा में सपा की इस रणनीति की काट पर मंथन हो सकता है।

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