कोंच-उरई। ब्राह्मण महासभा एवं नगर विद्वत् परिषद् के संयुक्त तत्वाधान एवं भगवान परशुराम के सानिध्य में महासभा परिसर में जारी धार्मिक कार्यक्रमों के बीच बीती रात रंगारंग काव्य संध्या का आयोजन किया गया जिसमें नामचीन और नवोदित कवियों व शायरों ने अपनी अनूदित रचनाओं से ऐसा शमां बांधा कि लोग वाह वाह कर उठे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृपाशंकर द्विवेदी बच्चू महाराज ने इस अवसर पर रचना भी बांची और साहित्यकारों को देश व समाज को नई दिशा देने का संवाहक भी बताया।
ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष देवीदयाल रावत की अध्यक्षता और महामंत्री अनुरुद्ध मिश्रा के शुरुआती संचालन में आयोजित काव्य संध्या में बतौर संरक्षक ब्रजमोहन तिवारी एवं बिशिष्ट अतिथि रामलीला बिशेषज्ञ रमेश तिवारी व बरिष्ठ पत्रकार पुरुषोत्तमदास रिछारिया मंचस्थ रहे। अतिथियों के स्वागत और मां सरस्वती की पूजा अर्चना के बाद संचालन की बागडोर संतोष तिवारी सरल ने संभाली। दिनेश मानव ने मां वीणापाणि का आह्वान करके कार्यक्रम को गति प्रदान की। चूंकि आध्यात्मिक माहौल था सो कवि नंदराम स्वर्णकार भावुक ने अपनी रचना का केन्द्र अध्यात्म को बनाते हुये रचना पाठ किया, श्विप्र गौ संतों का सकल संताप हरने को, असुर संहार करने को, परशु अवतार होता है…्य। साहित्यकार नरेन्द्र मोहन मित्र ने अपनी रचना बांचते हुये कहा, श्संतों जैसी ज्योति जगाना मुश्किल है, मीरा जैसे भजन सुनाना मुश्किल है, रामचरित मानस घर घर वरदान बनी, तुलसी का अहसान चुकाना मुश्किल है…्य। हास्य कवि ओंकारनाथ पाठक ने वैटर हाफ को लेकर रचना सुनाई, रात में जब भी मेरे पास आते हैं, लाल सिंदूर देखकर वहीं ठिठक जाते हैं, इसलिये बहिन हरा सिंदूर लगाती हूं, तभी उन्हें पति होने का सुख दे पाती हूं…। डॉ. मृदुल दांतरे ने अपना व्यंग्य पढा, जिनको थामा था हाथ पकड़, वो खाली दस्ताने निकले, इस दुनिया में न जाने कितने बेगाने निकले, बोलते न थे मृदुल की सख्शियत पर, उन गूंगों के भी तराने निकले…। वीरेन्द्र त्रिपाठी ने अपनी व्यंग्य रचनाओं से लोगों की उतारने में कोई कसर बाकी नहीं उठा रखी। कवि भास्करसिंह माणिक्य, संजय सिंघाल, आनंद शर्मा, नरोत्तम स्वर्णकार, संजीव सरस, अरुणकुमार वाजापेई, प्रेम चैधरी नदीम, मोहनदास नगाइच, ब्रजेश कुमार नायक आदि की रचनायें भी सराही गईं। संचालन करते हुये संतोष तिवारी सरल ने कहा, अमृत लिखता हूं गरल लिखता हूं अपने जीवन पे गजल लिखता हूं, कठिन भाषा मुझे गवारा नहीं जो भी लिखता हूं सरल लिखता हूं…। आभार महासभा महामंत्री अनुरूद्घ मिश्रा ने जताया एवं कवियों व अतिथियों को अंगवस्त्र व श्रीफल प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान आनंद दुवे, लल्लूराम मिश्रा, संजय रावत, आनंद दुवे, विनोद अग्निहोत्री, अतुल शर्मा, अखिलेश बबेले, हरिश्चंद्र तिवारी, राघवेन्द्र तिवारी, मुकेश शास्त्री, केके यादव, अतुल शर्मा, अमित रावत, विष्णुकान्त शास्त्री, अवधेश दीक्षित, अमर सिंह यादव, दिनेश दुवे, शिवांग दुवे, अमरेन्द्र दुवे, राजेन्द्र भारद्वाज, किशोर यादव, बंटे रावत, रूपेश तिवारी, सुधीर दुवे सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।







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