नये प्रत्याशी भी जनता के सामने समर्थन मांगने पहुंच सकते है। फिलहाल तो अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा लेकिन जिस तरह से सपा नेताओं की निष्ठायें मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव के बीच में बटी दिख रही है यदि सब कुछ सामान्य भी हो गया तो भी उसका नुकसान विधानसभा चुनाव में पार्टी को ही उठाना पड़ सकता है। े राजनैतिक विश्लेषक इस ओर अपनी नजरें गड़ाये हुये है। समाजवादी पार्टी में चल रहा पारिवारिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। यह बात जहां पार्टी के युवा नेताओं को परेशान किये हुए है तो वहीं पुराने समाजवादी नेता फिलहाल इस मामले में खुलकर बात करने को तैयार नहीं होते। नेताओं से लेकर कार्यकर्ता केवल इतना कहते है कि वह समाजवादी पार्टी के साथ है। यदि दो फाड़ होने की पार्टी में स्थिति बनी तो जिले के युवा नेताओं की बड़ी टीम मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ खड़ी दिखायी दे सकती है। वही ंखुद को समाजवादी नेता कहने वाले पुराने नेता व कार्यकर्ता नेता जी मुलायम सिंह यादव के निर्देशों का पालन करेंगे ऐसा लगभग स्पष्ट भी हो गया है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी में दो फाड़ की स्थिति बनती है तो वर्तमान में पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशी किस पाले में होंगे इस बारे में अभी कुछ ही कहना जल्दबाजी होगा। यदि तीनों घोषित प्रत्याशी एक गुट में रहते है तो दूसरा गुट नये प्रत्याशियों की घोषणा करेगा जिससे चुनावी समीकरण भी बदलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।






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