08orai01 08orai02उरई। बुंदेलखंड में बसपा ने दो विधायकों सहित 13 पूर्व प्रत्याशियों के टिकट बदल दिये हैं। पैसे लेकर टिकट बांटने के आरोपों का सामना कर रहीं बसपा सुप्रीमों मायावती ने अपने इस सबसे मजबूत इलाके में जमीनी और मिशनरी कार्यकर्ताओं को यह दाग मिटाने के लिए तवज्जों दी है। प्रत्याशियों में ग्याचरण दिनकर, प्रागीलाल अहिरवार, कृष्णपाल सिंह राजपूत, फेरन लाल अहिरवार और जगदीश प्रजापति जैसे लोग शामिल हैं। जिनके बारे में कोई माई का लाल यह नहीं कह सकता कि इनसे पार्टी पैसा वसूल करेगी। जगदीश प्रजापति जालौन जिले के कदौरा कस्बे के रहने वाले हैं। लंबे समय तक वे बसपा के दिल्ली कार्यालय में होल टाइमर की हैसियत से काम करते रहे हैं। मायावती ने अपनी पिछली सरकार में इसके इनाम बदौलत उनकी पत्नी को कदौरा का ब्लाॅक प्रमुख निर्वाचित कराया था। खुद जगदीश प्रजापति को एक निगम का चेयरमैन बनाकर राज्यमंत्री का प्रोटोकाॅल उपलब्ध कराया था।
जिन विधायकों के टिकट कटे हैं उनमें जालौन जिले की माधौगढ़ सीट के विधायक संतराम कुशवाहा और महोबा के राजनारायण उर्फ रज्जू बुधौलिया शामिल हैं। बताया यह जाता है कि रज्जू बुधौलिया ने खुद ही चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। हालांकि वे अपने भाई को चरखारी सीट से उम्मीदवार बनाने की याचना मायावती से करते रहे थे। लेकिन उनकी सुनवाई नही की गई। बदलाव में महोबा से उनकी जगह अरिमर्दन सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है जो 1989 में पहली बार जनता दल से विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके बाद अशोक चंदेल के बसपा में आने पर उनके साथ ही बसपा से जुड़कर विधायक हो गये थे। अशोक चंदेल ने पांच लोगों की सामूहिक हत्या के मुकदमें में बसपा के टिकट से सांसद बनने के बाद मोक्ष हासिल करके पार्टी छोड़ दी थी लेकिन इस बार अरिमर्दन सिंह ने उनका अनुसरण नही किया था। गत् चुनाव में टिकट कट जाने के बावजूद वे बसपा में बने रहे। इस वफादारी का इनाम उन्हें वर्तमान चुनाव में पार्टी का टिकट थमा कर मायावती ने दिया।
चरखारी सीट से स्वनाम धन्य केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमाभारती 2012 के विधानसभा चुनाव में निर्वाचित हुईं थीं। 2014 में झांसी से लोकसभा के लिए निर्वाचित होने और केंद्रीय मंत्री बनने के बाद चरखारी सीट पर हुए उपचुनाव में उनसे नाराज मतदाताओं ने भाजपा को सबक सिखाते हुए सपा के कप्तान सिंह को विधायक निर्वाचित कर लिया था। जब हत्या के एक मुकदमें में उन्हें आजीवन कारावास की सजा अदालत ने दे दी तो इस सीट पर एक बार फिर उपचुनाव हुआ जिसमें उनकी पत्नी उर्मिला राजपूत निर्वाचित कर लीं गईं। 2012 में इस सीट से बसपा के उम्मीदवार पूर्व मंत्री चै. धू राम तीसरे नंबर पर रहे थे जो अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। बसपा ने वर्तमान में इस सीट से जितेंद्र कुमार मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है। जितेंद्र कुमार मिश्रा खनन व्यवसाई होने से हर तरह से साधन संपन्न हैं। उनकी पत्नी समाजवादी पार्टी से जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। उधर माधौगढ़ सीट पर बसपा ने वर्तमान विधायक संतराम कुशवाहा की जगह गिरीश अवस्थी पर दांव लगाया है। गिरीश अवस्थी नारायण दत्त अहिरवार के प्रयासों से 2007 की सरकार के समय बसपा से जुड़े थे। बसपा की सरकार जाने के बाद भी उन्होंनें पार्टी नही छोड़ी। गिरीश अवस्थी कांग्रेस की पत्रकार से नेता बने एक बड़ी हस्ती के रिश्तेदार हैं। उनकी पृष्ठभूमि और वफादारी ट्रंप कार्ड साबित हुई। जिसके चलते मौजूदा विधायक का टिकट काटकर पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया। उनका टिकट आखिरी समय कट जाने की बहुत चर्चाएं थीं लेकिन उन्हें जानने वाले मानते थे कि उनकों कोई टस से मस नही कर पायेगा और उनका यह यकीन सही साबित हुआ।
उरई सदर की सीट पर पिछली बार बसपा से बृजलाल खाबरी के साले सत्येंद्र प्रताप सिंह उर्फ श्रीपाल ने चुनाव लड़ा था। वे मामूली अंतर से हारे थे लेकिन उनके जीजा के पार्टी छोड़ देने से उनकी वफादारी भी संदिग्ध मानकर इस सीट पर मायावती ने बृजलाल खाबरी के धुर विरोधी माने जाने वाले कोंच के पूर्व विधायक अजय पंकज को उम्मीदवार बनाया है। अजय पंकज का टिकट 2012 के चुनाव में पार्टी ने खाबरी के कहने से काट दिया था। फिर भी वे पार्टी में बने रहे। उन्हें मुख्य रूप से इसी बात का फायदा मिला। जालौन जिले की कालपी सीट से पिछली बार खाबरी के ही खास सिपहसलार संजय भदौरिया बसपा उम्मीदवार थे। हाल में वे भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इस सीट पर खाबरी के कोप का शिकार होकर 2012 के चुनाव में टिकट से वंचित किये गये पूर्व विधायक छोटे सिंह चैहान पर भरोसा जताया गया है।
झांसी जिले की बबीना सीट पर सपा के कददावर नेता चंद्रपाल सिंह यादव को हराने वाले कृष्णपाल सिंह राजपूत की उम्मीदवारी बहाल रखी गई है। केपी राजपूत को पूरी तरह मिशनरी माना जाता है। उन्हें कई बार सपा सरकार में दमनचक्र का शिकार बनाया गया। विधायक बने रहने के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति बेहद मामूली है। इसीलिए इस सीट की बोली लगाने के लिए कई लोग आगे आये थे लेकिन मायावती ने अंततोगत्वा उनकी उम्मीदवारी कायम रखी। झांसी सीट पर गत चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे सीताराम कुशवाहा का टिकट नही काटा गया है। लेकिन मऊरानीपुर में इस बार पार्टी ने राजेंद्र राहुल की जगह प्रागीलाल अहिरवार को उम्मीदवार बनाया है। प्रागीलाल भाजपा से तीन बार विधायक रह चुके हैं। इसके बावजूद उनकी हालत दीनहीनों जैसी है। वे चुनाव प्रचार के लिए टैंपो मैक्स के काम चला रहे हैं।
गरौठा सीट पर सपा के बाहुवली विधायक दीपनारायण पर बसपा ने पिछली बार भी देवेश श्रीवास्तव को उम्मीदवार बनाकर मेहरबानी की थी। दीपनारायण को खतरा डमडम महाराज की उम्मीदवारी से लगता था लेकिन बसपा के काॅर्डिनेटर इस तरह मैनेज हुए कि डमडम महाराज चुनाव का आगाज होने के पहले ही पार्टी से बाहर हो गये। अब इस सीट पर पार्टी ने डाॅ अरुण कुमार मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है। चुनाव नतीजा कुछ भी हो लेकिन दीपनारायण के मुकाबले उन्हें फिलहाल बेहद हल्का उम्मीदवार माना जा रहा है। ललितपुर जिले की दोनों सीटों पर विधायकों का टिकट बरकरार रहा। हमीरपुर सीट पर 2012 के चुनाव में बसपा के उम्मीदवार फतेह मुहम्मद खान तीसरे नंबर पर रहे थे। इस सीट पर पार्टी ने संजय दीक्षित को उम्मीदवार बनाया है। तिंदवारी में अच्छे लाल निषाद का टिकट काटकर जालौन जिले के मिशनरी कार्यकर्ता जगदीश प्रजापति को लाया गया है। जगदीश प्रजापति को दो वर्ष पहले ही इस सीट से चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे दी गई थी जिससे वे तब से तिंदवारी में ही जमे हुए हैं। बांदा सीट से भी पार्टी ने पिछले प्रत्याशी दिनेश चंद्र शुक्ला का टिकट काट दिया है और उनकी जगह मधुसूदन कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। राठ में पिछले चुनाव में बसपा प्रत्याशी रामसहाय अहिरवार चैथे स्थान पर रहे थे जिससे पार्टी की भारी किरकिरी हुई थी। पार्टी ने इस बार उनकी जगह अनिल कुमार अहिरवार को प्रत्याशी घोषित किया है। चित्रकूट में पिछले प्रत्याशी रामसेवक की जगह जगदीश प्रसाद गौतम को उम्मीदवार बनाया गया है जो कि ददुआ के बेटे सपा विधायक वीरसिंह पटेल का मुकाबला करेंगे। बबेरू में बृजमोहन कुशवाहा को रिपीट करने की बजाय किरन यादव पर भरोसा जताया गया है जो कि सपा के एक और बाहुवली विधायक विशंभर यादव से मुकाबिल होगीं। नरैनी में नेता प्रतिपक्ष ग्याचरण दिनकर और मानिकपुर में चंद्रभान सिंह पटेल के टिकट बरकरार रखे गये हैं।

फोटो नं.-01-गिरीश अवस्थी
02-जगदीश प्रसाद प्रजापति

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