0 एक आरोपी हिरासत में, अन्य की तलाया जारी
0 जमरोही कलां में हत्या के बाद तनाव, मृतक व आरोपी के घरों पर फोर्स तैनात
कोंच-उरई। एट थाना क्षेत्र के ग्राम जमरोही कलां में एक अधेड़ को बहला फुसला कर घर से ले जाने के बाद उसकी हत्या कर शव तालाब में छिपा दिया गया। मृतक के पुत्र द्वारा थाना पुलिस को इत्तिला दी गई कि उसके पिता को पूर्व प्रधान घर से दो दिन पहले ले गया था लेकिन तब से आज तक उसका कोई पता नहीं है। इस शिकायत पर थाना पुलिस गांव पहुंची और उक्त पूर्व प्रधान को हिरासत में लेकर जब उससे कड़ाई से पूछताछ की गई तो उसने हत्या की बात स्वीकर कर ली और शव बरामद करवाया। इस वारदात की खबर जंगल में आग की तरह गांव में फैल गई जिससे वहां तनाव व्याप्त हो गया। मृतक के परिजनों और समर्थकों ने आरोपी के घर में जमकर उपद्रव किया और सारा सामान तोडफोड़ डाला। पुलिस ने किसी तरह स्थिति पर काबू पाया। तनाव की स्थिति देख मृतक और आरोपी के घरों के बाहर पुलिस का पहरा बिठा दिया गया है। एएसपी ने भी घटना स्थल का दौरा किया है, उन्होंने कहा है कि मामले में कुछ और लोग भी शामिल हैं जिनकी तलाश की जा रही है। मोटे तौर पर हत्या के पीछे तालाब की मछलियों को लेकर विवाद बताया जा रहा है, लेकिन सही कारण पुलिस की छानबीन के बाद ही निकल कर आने की संभावना है।
मिली जानकारी के मुताबिक कोंच तहसील और सर्किल के थाना एट अंतर्गत ग्राम जमरोही कलां के रहने बाले भगवानदास भाटिया (55) अहिरवार पुत्र नथू अहिरवार को गुजरी 15 जनवरी की देर शाम गांव का ही पूर्व प्रधान ज्ञानसिंह कुशवाहा पुत्र घनाराम तथा उसका एक मित्र मानवेन्द्रसिंह निवासी मड़ोरा थाना पूंछ जिला झांसी बहला फुसला कर बाईक से लिवा ले गये थे। इसके बाद से भगवानदास फिर लौट कर घर नहीं पहुंचा। उसके बेटों ने उसे खोजने का काफी प्रयास किया लेकिन जब कहीं पता नहीं लगा तो उसके बेटे लखपतसिंह ने यूपी 100 की गाड़ी को फोन मिला कर अपनी समस्या बताई। यूपी 100 ने यह सूचना एट थाने को पहुंचा दी। इसी बीच ज्ञानसिंह गांव में आ गया तो लखपत ने उससे पिता के बारे में पूछा। ज्ञानसिंह ने यह कह कर कि वह तो उसके पिता को उसी के घर छोड़ गया था, इसके बाद वह कहां गया नहीं मालूम। ज्ञानसिंह की बात पर लखपत को भरोसा नहीं हुआ और वह अपने परिजनों और साथियों के साथ ज्ञानसिंह के घर में घुस गया और तलाश शुरू की तो वहां उसे खून के छींटे मिले लेकिन भगवानदास का सुराग नहीं लग सका। यह देख आपा खो दिये लखपत और उसके संगी साथियों ने ज्ञानसिंह के साथ मारपीट शुरू कर दी। लोगों ने ज्ञानसिंह को उनके चंगुल से छुड़ा कर एक घर में बंद कर दिया। लखपत ने थाना पुलिस को सारे बाकिये से अवगत कराते हुये आशंका जताई कि उसके पिता की हत्या कर शव को कहीं छिपा दिया गया है।
मौंके पर थाना प्रभारी मनोजसिंह पहुंच गये, उन्होंने ज्ञानसिंह से पूछताछ की लेकिन वह भगवानदास के बारे में अनभिज्ञता जताता रहा। एसओ उसे एट थाना ले गये और जब उसमें कायदे से हवा भरी तो उसने सब कुछ तोते की तरह उगलना शुरू कर दिया। उसने बताया कि भगवानदास की हत्या कर शव को तालाब के किनारे गाड़ दिया गया है और ऊपर से घासफूस डाल दी गई है। एसओ ने अपने उच्चाधिकारियों को भी सारे मामले से अवगत करा दिया। एएसपी सुभाषचंद्र शाक्य, एसडीएम मोईन उल इस्लाम सीओ नवीन कुमार नायक, तहसीलदार भूपाल सिंह आदि भी गांव पहुंच गये। ज्ञानसिंह की निशान देही पर तालाब किनारे से भगवानदास का शव बरामद कर लिया गया है। जैसे ही शव बरामद हुआ, मृतक के परिजनों ने ज्ञानसिंह के घर में घुस कर जमकर उपद्रव मचाया और सामान की तोडफोड़ कर घर से बाहर फेंक दिया। पुलिस ने किसी तरह हालात पर काबू किया। शव का पंचायतनामा भर कर पोस्टमॉर्टम के लिये भेज दिया है। मृतक के पुत्र लखपत ने पांच लोगों ज्ञानसिंह व इनके दो बेटे राजकुमार व शिवकुमार, मानवेन्द्र सिंह तथा पंकज पुत्र महाराजसिंह निवासी जमरोही के खिलाफ हत्या की तहरीर एट थाना पुलिस को दी है। हत्या जैसी जघन्य वारदात किस मकसद से की गई है, यह तो फिलहाल पुलिस जांच का विषय है लेकिन प्रथम दृष्टया जो बताया गया है उसके मुताबिक मृतक और आरोपी गांव के एक अन्य तालाब में मछलियों में पार्टनर थे और मछलियों की मृत्यु हो गई थी। ज्ञानसिंह को अंदेशा था कि भगवानदास इसके ऐवज में मिलने बाली सहायता राशि अकेले ही हड़प जायेगा। उसने जब इस संबंध में मृतक से बात की तो बताते हैं कि उसने भी ज्ञानसिंह की आशंका की पुष्टि कर दी। बस इसी बजह से भगवानदास को अपनी जान गंवानी पड़ी है। हालांकि इस जघन्यतम हत्या को लेकर पुलिस
की ओर से कोई आधिकारिक बयान फिलवक्त नहीं आया है। एएसपी ने भी मामले की जांच की बात कही है।
मृतक के घरवालों ने आरोपी के यहां किया तांडव
ग्राम जमरोही कलां में दलित भगवानदास की हत्या से उपजे आक्रोश का नतीजा रहा कि मृतक के तरफ के दर्जनों लोग आरोपी ज्ञानसिंह के घर में घुस गये और जमकर उत्पात मचाया। सामान की तोडफोड़ करने के बाद उसे तितर बितर कर दिया और घर से बाहर फेंक दिया। यह तांडव काफी समय तक जारी रहा, घर के किबाड़ फाड़ दिये गये, सोफे आदि तोड़ दिये गये और घर का अन्य सामान भी तहस नहस कर दिया गया। यहां तक कि मृतक के परिजन आरोपी का ट्रैक्टर भी उठा कर अपने यहां ले गये। बड़ी मुश्किल में पुलिस ने हालातों पर काबू पाया। गांव में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुये आरोपी और मृतक के घरों के बाहर भारी मात्रा में फोर्स तैनात कर दी गई है।
हत्या के दूसरे दिन लगाया गया शव केो ठिकाने
भगवानदास की हत्या 15 जनवरी की ही रात में कर दी गई थी और शव रात भर ज्ञानसिंह के घर में ही रहा। कहीं कोई देख न ले को लेकर शव को ठिकाने लगाने की हिम्मत हत्यारों की नहीं हुई। हत्या केरने के बाद हत्यारे उसी दिन गांव छोड़ कर भाग गये थे और दूसरे दिन देर शाम बापिस आने के बाद उन्होंने 16ध्17 जनवरी की रात किसी तरह हिम्मत जुटा कर शव को घर से बाहर निकाला और तालाब तक ले जाकर किनारे पर ही गड्ढे में छिपा दिया और ऊपर से घासफूस डाल दी। पुलिस द्वारा कुछ नहीं बताने के कारण अभी यह कहना मुश्किल है कि घटना में कितने लोगों की संलिप्तता रही है, लेकिन समझा जा रहा है कि इसमें कई लोगों की संलिप्तता हो सकती है क्योंकि बजनी लाश उठाना एक दो लोगों के वश की बात नहीं है। गांव का ही एक युवक भी शक के घेरे में बताया जा रहा है।






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