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उरई। मुफ्त भोजन न देने पर खाकी का रौब दिखाते हुए एक दरोगा ने अपने हमराही सिपाहियों के साथ मिलकर होटल संचालक की पिटाई कर दी। बीचबचाव करने आई होटल संचालक की पत्नी व बेटी को भी कानून के रखवालों ने नहीं बख्शा और उनके साथ भी अभद्रता की। दरोगा की पिटाई से होटल संचालक बुरी तरह जख्मी हो गया। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पीड़ित पक्ष ने अपर पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। वहीं एएसपी ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सीओ जालौन को जांच के आदेश दिए हैं। कुठौंद थाना क्षेत्र के ग्राम नैनापुर निवासी सुबोध मिश्रा पुत्र हरीशंकर मिश्रा का गांव में ही नैनापुर बस स्टैंड पर खाने का होटल है। आरोप है कि कुठौंद थाने में तैनात एसआई धर्मेंद्र यादव आए दिन सुबोध के होटल पर अपने साथियों के साथ खाना खाने के लिए आता था और रुपए भी नहीं देता थे। बुधवार की देर रात को भी उक्त दरोगा अपने तीन हमराही सिपाहियों के साथ सरकारी जीप से सुबोध के होटल पर पहुंचा और खाना खाया। इसके बाद खाने के रुपए मांगने पर वह होटल कर्मचारियों के साथ गालीगलौज करने लगा तभी वहां पर आए होटल मालिक सुबोध मिश्रा के साथ दरोगा ने अपने हमराहियों के साथ मिलकर मारपीट शुरू कर दी। चीखपुकार की आवाजें सुनकर होटल के ऊपर कमरे में रहने वाली होटल मालिक की पत्नी व नाबालिग बेटी भी मौके पर पहुंच गईं और वह बीचबचाव करने लगीं। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने महिला व नाबालिग बेटी के साथ भी अभद्रता की और अश्लील गालियां दीं। दरोगा की पिटाई से होटल मालिक सुबोध मिश्रा बुरी तरह जख्मी हो गया। इसके बाद उक्त आरोपी पुलिसकर्मी धमकी देते हुए मौके से निकल गए। पूरी घटना होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है। गुरूवार को पीड़ित पक्ष एएसपी सुभाष चंद्र शाक्य को शिकायती पत्र देने आए और उन्होंने न्याय की गुहार लगाते हुए आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि दरोगा धर्मेंद्र यादव मारपीट के दौरान कह रहा था कि प्रदेश में फिर से सपा की सरकार बनवानी है और तुम अपने होटल पर बीजेपी का प्रचार कर रहे हो इसलिए चुनाव के समय तुम्हारा होटल नहीं चलने दूंगा। एएसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जालौन सीओ संजय कुमार मिश्रा को पूरे मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं।
पीड़ित को नहीं भेजा चिकित्सकीय परीक्षण के लिए
उरई। एएसपी से गुहार लगाने के बाद भी पीड़ित होटल संचालक को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए नहीं भेजा गया है। हालांकि इस मामले में एएसपी ने जांच के आदेश तो दे दिए हैं पर पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने के लिए पीड़ित का चिकित्सकीय परीक्षण नहीं कराया गया है। इससे पीड़ित पक्ष पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली से पूरी तरह संतुष्टï नजर नहीं आया।





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