उरई। दो महीने पहले अपहृत किये गये व्यक्ति के शव का कंकाल लेकर उसके घर की महिलाओं ने कोतवाली में धरना दे दिया। जिससे पुलिस में अफरा-तफरी मच गई। महिलाओं को शव हटाने के लिए राजी करने का प्रयास किया जा रहा था लेकिन महिलाएं मानने को तैयार नही थीं। उधर सीनियर पुलिस अफसर भी इस मामले में पुलिस पर लगाये जा रहे आरोपों पर कुछ भी बोलने से कतराते रहे।
इंदिरा नगर निवासी अमृतलाल का गत् 26 अक्टूबर को पड़ोस में रहने वाले बम्होरी निवासी जितेंद्र राजपूत से विवाद हो गया था। इस मामले में उसकी तहरीर पर पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई कर दी जिसमें दोनों को अपनी जमानतें करानी पड़ी। अमृत लाल की पत्नी संतो देवी का कहना है कि गत् 5 नवंबर को इसी मामले में बात के लिए कुछ लोग उसके पति को बम्होरी ले गये। लेकिन जब रात तक वे नही लौटे तो अंदेशे की वजह से उसने उनके मोबाइल पर काॅल की, पर मोबाइल स्विच आॅफ था। इससे उसका संदेह और गहरा गया। इस बीच उसके मोबाइल पर एक फोन आया कि तुम्हें अपना पति सही सलामत चाहिए तो 5 लाख रुपये का इंतजाम कर लो। उसने इसकी सूचना पुलिस के सारे अधिकारियों को दी। लेकिन बकौल उसके पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठे रही जिससे उसके पति का मर्डर हो गया।
गौरतलब है कि अमृतलाल का कंकाल बुधवार को देर रात बम्होरी गांव में ही कुए में से बरामद किया गया था। हत्या के बाद उसके शव को भारी पत्थर बांधकर कुए में फेंका गया था तांकि वह पानी में उतरा न सके। कोतवाली में प्रदर्शन करते हुए महिलाएं आरोप लगा रहीं थी कि उसके पति की हत्या पुलिस से मिलकर कराई गई है। जिसे देखते हुए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा कायम किया जाये। अपर पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र शाक्य ने पूंछने पर कहा कि आरोप की जांच की जायेगी अभी इससे ज्यादा कुछ नही कहा जा सकता।






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