23orai01उरई। भारतीय जनता पार्टी की सूची में जिले की तीनों सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित होने के बाद असंतोष का तूफान मचल पड़ा है। सोशल मीडिया का प्लेटफार्म पार्टी के कटट्र समर्थक युवाओं की बगावती पोस्ट से पट गया। इससे घबराये पार्टी के रणनीतिकारों ने मंगलवार को आनन-फानन में पत्रकार वार्ता के जरिये एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की।
भारतीय जनता पार्टी ने माधौगढ़ सीट से पूर्व जिलाध्यक्ष मूलचरन निरंजन और कालपी क्षेत्र से भी एक और पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह जादौन को प्रत्याशी बनाया है। यह दोनों नाम अप्रत्याशित माने जा रहे हैं। जबकि उरई सदर सुरक्षित सीट पर पिछली बार तीसरे स्थान पर रहे गौरी शंकर वर्मा पर ही पार्टी ने भरोसा कायम रखा है।
पिछले वर्ष के आखिरी महीनों से जिले में भाजपा के जो नेता जोड़-तोड़ में पूरी ताकत लगाये थे उन्हें यकायक किनारे किये जाने से तमाम लोग सदमे में हैं। माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र में मुख्य रूप से पूर्व विधायक संतराम सिंह सेंगर, पूर्व मंत्री हरीओम और एक अन्य पूर्व विधायक केशव सिंह सेंगर टिकट की कतार में थे। केशवेंद्र को भी उनके बहनोई और अखिलेश सरकार में मंत्री रहे अरिमर्दन सिंह के भाजपा में आ जाने से गोपनीय तौर पर भाजपा के टिकटार्थियों में शामिल माना जा रहा था। लेकिन इन सबकी दावेदारी नकार कर पार्टी ने मूलचंद्र निरंजन को प्रत्याशी बनाने का फैसला किया जो खासतौर पर पार्टी के जनरल कास्ट के लोगों को रास नही आ रहा है। ब्राहमण समाज तो जिले में पार्टी द्वारा एक भी सीट उसके किसी नेता को न दिये जाने से इंतहाई खफा है। सोशल मीडिया पर एलान किया जा रहा है कि जिले में एक भी ब्राहमण भाजपा को वोट नही करेगा। दूसरी ओर ठाकुर समाज भी पार्टी के फैसले को नाकाबिले बर्दास्त बताते हुए जता रहा है कि भाजपा की जगह बसपा को छोड़कर किसी भी दल को एक मुश्त समर्थन देने की रणनीति तय की जायेगी।
हालांकि भाजपा ने जिले की कालपी सीट से क्षत्रिय समाज के ही नरेंद्र सिंह जादौन को प्रत्याशी बना दिया है लेकिन क्षत्रिय समाज को यह भी फैसला मंजूर नही है। क्षत्रिय समाज के लोग बिरादरी में बृजभूषण सिंह मुन्नू या संतराम के लिए टिकट चाहते थे। वैसे उनकी ब्राहमणों से यह अघोषित सहमति बनी हुई थी कि पार्टी से माधौगढ़ सीट अपने नेता के लिए लेंगे और कालपी सीट पर ब्राहमण प्रत्याशी का समर्थन करेंगे।
इस सीट पर ब्राहमण नेताओं में सबसे अधिक प्रभावी दावेदारी रविकांत द्विवेदी की थी। दूसरी ओर यह भी माना जा रहा था कि पार्टी ब्राहमण के साथ-साथ महिला कोटे की पूर्ति के लिए उर्विजा दीक्षित को उम्मीदवार बनायेगी। इसके अलावा बसपा से भाजपा में कुछ महीने ही शामिल हुए सुशील द्विवेदी को भी इस सीट से वजनदार उम्मीदवार माना जा रहा था। लेकिन नरेंद्र पाल सिंह जादौन का नाम पार्टी ने तय किया तो स्थानीय कैडर अब हतप्रभ रह जाने की स्थिति में है।
अप्रत्याशित नाम तय कराने में भाजपा के प्रदेश महामंत्री स्वतंत्रदेव की भूमिका बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर खबरें डाली गई थी कि सोमवार को हुए उक्त नामों के एलान के बाद भाजपा सांसद भानुप्रताप वर्मा बेहद नाराज हैं। इससे भाजपा के चुनाव अभियान पर शुरूआत के पहले ही अंदेशों के बादल मंडरा उठे थे।
डैमेंज कंट्रोल के लिए इसी कारण मंगलवार को हुई पत्रकार वार्ता में जिलाध्यक्ष उदयन पालीवाल के साथ सांसद भानु वर्मा और पूर्व जिलाध्यक्ष उदय सिंह पिंडारी भी मौजूद रहे। तीनों प्रत्याशियों ने इस वार्ता में पत्रकारों के सवालों का जबाव दिया। यह बताया गया कि तीन सीटों पर 54 लोगों ने आवेदन किया था। हाईकमान द्वारा इनमें से तय किये गये नामों को सभी प्रत्याशी मंजूर कर रहे हैं। 27 जनवरी को लल्ला धाम में होने वाले आयोजन में घोषित किये गये प्रत्याशियों के साथ सभी आवेदक एकजुटता दिखाने के लिए मौजूद रहेंगे।
इस अवसर पर भानुप्रताप वर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी से मुक्ति दिलाने के नाम पर चुनाव लड़ेगी जिसमें जिले के सभी मतदाताओं का साथ उन्हें हासिल होगा। उन्होंने हाईकमान द्वारा तय किये गये नामों पर अपने किसी तरह के एतराज से इंकार किया है।

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