konch1पहाडगांव-उरई। ग्राम कमतरी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास पं. ब्रह्मानंद शास्त्री अयोध्या ने भगवद् अवतरण का हेतु बताते हुये कहा कि भक्तों के कष्ट दूर करने के लिये ही भगवान का इस धरा पर प्राकट्य होता है लेकिन यह तभी सम्भव है जब भक्त निश्छल और कपटरहित हृदय से उनका स्मरण करता है। उन्होंने परमात्म तत्व के बारे में भी श्रोताओं को विस्तार से बताया।
दयासागर बुधौलिया द्वारा संयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के दौरान पं. ब्रह्मानंद शास्त्री ने अपनी रसमयी वाणी से श्रोताओं को भगवद्कथाओं का रसपान कराया। भगवान की मनोहारी लीलाओं का वर्णन सुन श्रोता भावविभोर हो गये। उन्होंने कथा प्रवाह के दौरान भगवान के अवतरण का हेतु बताते हुये कहा कि गाय, ब्राह्मण, संत और सत्संगी जीवों पर जब भी विपत्ति आती है और वे निर्मल मन से जब भगवान का स्मरण करते हैं तब परमात्मा किसी न किसी रूप में इस धरा पर अवतार धारण करते हैं-
निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा।
कथा व्यास बताते हैं कि परमात्मा का वास सब जगह है, बस जरूरत है उसे पहचानने की। जो भी उसे सच्चे मन से स्मरण करता है वह अवश्य ही उसे प्राप्त होता है। आज की कथा में उन्होंने गंगावतरण की मनभावन कथा सुनाईं। उन्होंने श्रोताओं को इंगित करते हुये कहा कि जो भी भागवत की कथाओं का श्रवण करता है उनका अंशमात्र भी अगर वे अपने जीवन में उतार सके तो उनका कथा श्रवण सफल हो जायेगा और उनकी मुक्ति के द्वार स्वतरू ही खुल जायेंगे। उन्होंने अजामिल की कथा सुनाते हुये भगवान के नाम की महत्ता वर्णन किया, कहा कि दुष्टात्मा अजामिल ने अपने पुत्र का नाम नारायण रख लिया और अपने अंत समय में जब उसने नारायण को पुकारा तो भगवान स्वयं वहां पधारे और उसकी ज्योति को अपने में विलीन कर उसे मुक्ति का मार्ग दिया। परीक्षित दयासागर बुधौलिया ने भागवतजी की आरती उतारी। वाद्य यंत्रों में आर्गन पर कन्हैयालाल शर्मा, तबले पर शिशुपाल परिहार, पैड पर अनूप शर्मा व भजन गायक अमित दुवे संगत कर रहे हैं।

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