उरई। जालौन जिले में समाजवादी पार्टी ने तीन विधानसभा क्षेत्रों में से केवल एक सीट पर प्रत्याशी की घोषणा की है। जानकार सूत्रों का कहना है कि दो अन्य सीटें सपा द्वारा कांग्रेस के हवाले किये जाने का निश्चय हो चुका है। लेकिन अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नही हो पाई है।
जालौन जिला राजनैतिक दृष्टिकोण से समाजवादी पार्टी के लिए सबसे कमजोर माना जाता रहा है। मुलायम सिंह ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में जिले में पार्टी की मजबूत पकड़ बनाने के लिए राजकीय मेडिकल काॅलेज और रामपुरा क्षेत्र में कई बड़े पुलों के निर्माण की घोषणा की थी। लेकिन इसके बावजूद 2007 में वे जिले में अपनी पार्टी का खाता भी नही खुलवा पाये थे।
समाजवादी पार्टी को जिले में पहली सफलता 2009 के लोकसभा चुनाव में मिली जब घनश्याम अनुरागी साइकिल के बैनर से सांसद चुने गये। इसके बाद 2012 के चुनाव में सदर सीट पर दयाशंकर वर्मा ने कामयाब होकर जिले में विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी की बोहनी कराई। पार्टी 2017 में जिले की तीनों सीटों पर अपना परचम लहराने की तैयारी में जुटी हुई थी लेकिन कांग्रेस से हुए गठबंधन ने पांसा पलट दिया।
जिले की कालपी विधानसभा सीट फिलहाल कांग्रेस की विधायक उमाकांति सिंह के कब्जे में हैं। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस और सपा में इस सीट पर उमाकांति सिंह को दूसरा मौका दिये जाने की सहमति बन चुकी है। लेकिन माधौगढ़ में पेंच फसा हुआ है। कांग्रेस के उच्च स्तरीय नेता प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष विनोद चतुर्वेदी की प्रत्याशिता के लिए पूरी ताकत लगाये हुए हैं। हालांकि इस सीट पर गत चुनाव में उनका स्थान चैथा रहा था। इसलिए सपा इस सीट को कांग्रेस को देने के बारे में दुविधा में हैं। फिर भी सपा ने अभी तक इस पर अपना प्रत्याशी घोषित नही किया है। इस कारण यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अंततोगत्वा सपा का नेतृत्व भी इस सीट को कांग्रेस के सुपुर्द करने को तैयार हो जायेगी।
इस तरह जिले में महागठबंधन में कांग्रेस हीरो की स्थिति में रहेगी। हर गठबंधन की तरह इस गठबंधन को लेकर भी यह सवाल उठाये जा रहे हैं कि दोनों पार्टियां एक-दूसरे को अपने वोट किस सीमा तक ट्रांसफर करा पायेंगे। महागठबंधन के नतीजे बहुत कुछ इसी पर निर्भर रहेंगे।






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