25orai01 25orai02 25orai03 25orai04 25orai05उरई। रामपुरा थाना के टीहर गांव में इंटर काॅलेज के लेक्चरर के यहां मंगल और बुधवार की दरमियानी रात हुई वारदात कहीं सामूहिक नरसंहार की साजिश तो नही थी। हालांकि गृहस्वामी अपनी किसी से कोई रंजिश तो नही बता पा रहे लेकिन अगर यह वारदात डकैती के उददेश्य से की गई होती तो इसे अंजाम देने वाले बदमाश उनके घर से माल असबाब लिए बिना नही टलते। लेकिन बदमाश न नगदी और न कोई सामान ले गये हैं। बदमाशों ने वारदात के दौरान पूरे परिवार के साथ प्राण घातक मारपीट की। गृहस्वामी को तो गोली लगी है। उनकी बेटी और भाई को हालत बहुत ज्यादा नाजुक होने की वजह से जिला अस्पताल से भी रेफर किया जा चुका है। चुनावी चाकचैबंदी के बीच सुरक्षा व्यवस्था को तार-तार करने वाली इस वारदात को लेकर पुलिस का रवैया जिस तरह उपेक्षापूर्ण दिखा उससे गांव के ही नही बल्कि पूरे क्षेत्र के लोग क्षुब्ध और नाराज हैं।
अनुमान है कि बदमाश जवाहर इंटर काॅलेज गोहन के व्याख्याता अनिल दीक्षित (55वर्ष) के टीहर स्थित घर में वारदात के लिए रात में दो से सवा दो बजे के बीच दाखिल हुए। यह भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि बदमाश अनिल दीक्षित के घर के बगल से लगे सूने खपरैल में शाम से ही घात लगाकर बैठ गये थे। देर रात जब उन्होंने खपरैल के रास्ते उनकी छत पर चढ़कर जीने में लगे किवाड़ को तोड़ने की कोशिश की तो ठीक नीचे सो रहे अनिल दीक्षित की आंख खटखट की आवाजों से खुल गई। बदमाशों के अंदेशे के चलते उन्होनंे पड़ोस में मोबाइल से काॅल करके लोगों से कहा कि वे ऊपर से झांक कर देखें उनकी छत पर कहीं बदमाश तो नही खड़े हैं। उनका दुर्योग था कि पड़ोसियों ने जब छत से देखा तो बदमाश दुबक गये जिससे उन्होनें जबाबी काॅल करके छत पर कोई न होने की जानकारी अनिल दीक्षित को दे दी। इसके बाद अनिल दीक्षित और टोह लेने के लिए दरवाजा खोलकर बाहर निकले। जैसे ही वे घर से बाहर आये बदमाश उनकी ओर दौड़ पड़े। यह देख आतंकित अनिल दीक्षित ने रेस लगा दी। इसी बीच उनका पीछा करते हुए किसी बदमाश ने उन पर गोली चला दी जो उनके बांये पैर मे लगी। इसके बावजूद वे भाग निकले। उधर बदमाश उनके घर के भीतर दाखिल हो गये और उन्होनें उनकी पत्नी विभा (50वर्ष), बेटी निधि उर्फ गुड़िया (25वर्ष), बेटा निशांत (21वर्ष), भाई महेश चंद्र दीक्षित (60वर्ष) को कुल्हाड़ी, सब्बल व अन्य घातक हथियारों के वार से मरणासन्न कर दिया। गांव के अन्य लोग उनके बचाव के लिए सामने आने की जुर्रत न करें इसके मददेनजर कुछ बदमाश उनके मकान के बाहर बंदूक और तमंचों से फायरिंग करते रहे।
अनिल दीक्षित बताते हैं कि शायद उनका इरादा पूरे परिवार को मौत के घाट उतारना था। लेकिन उनकी खुश किस्मती यह थी कि उसी समय रामपुरा की तरफ से एक बुलेरो और एक ट्रक आता दिखाई दिया। जिससे बदमाशों ने समझा कि पुलिस आ रही है और वे रफूचक्कर हो गये। जबकि पुलिस का आलम यह था कि पड़ोसियों द्वारा फोन करने के बावजूद उसने आने में इतनी देर कर दी कि बदमाश पूरी तरह ओझल हो जायें। रामपुरा थाना क्षेत्र में डायल-100 की दो जीपें हैं। इसके बावजूद पुलिस को मौके पर पहुंचते-पहुंचते इतना विलंब कैसे हुआ इस सवाल पर जांच करने आये थानाध्यक्ष बृजनेश यादव ने मीडिया से कहा कि इन जीपों में एक सिद्धपुरा में थी और दूसरी ऊमरी में। अगर उनकी इस सफाई को भी माना जाये तो ऊमरी से टीहर की दूरी केवल तीन किलोमीटर है। ऐसी हालत में ऊमरी में गश्त करने वाली जीप को पहुंचने में कुछ मिनट पर्याप्त थे।
बदमाशों की संख्या सात बताई गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वे न केवल पैदल बल्कि नंगे पांव आये थे। इस आधार पर अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस वारदात में शामिल बदमाश क्षेत्रीय अराजक तत्व ही होगें। अनिल दीक्षित ने इस सवाल के जबाब में कि अगर बदमाश उनके घर हत्यायें करना चाहते थे तो इसका कारण होना चाहिए। क्या आपकी किसी से गंभीर रंजिश चल रही है। अनिल दीक्षित का कहना है कि उनकी किसी से भी रंजिश नही है। दूसरी ओर यह भी पता चला है कि अनिल दीक्षित के भाई महेश दीक्षित की पुत्री का कुछ ही दिन पहले अपने पति से तलाक हुआ था। इसके बाद महेश दीक्षित की आर्थिक हालत ठीक न होने से अनिल दीक्षित ही उनका और अपनी भतीजी का खर्चा उठा रहे थे। इस वजह से वे अपने भाई के उन रिश्तेदारों के निशाने पर हो सकते हैं जो उनसे दुश्मनी की हद तक खफा हों। लेकिन अनिल दीक्षित ने अपने पूर्व रिश्तेदारों पर जल्दबाजी में कोई आरोप लगाने से इंकार किया।
इस वारदात के बाद पूरे इलाके में असुरक्षा का माहौल गहरा गया है। अपर पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र शाक्य ने भी एसडीएम महेश चंद्र सोनी और सीओ अवधेश शुक्ला के साथ मौका मुआयना किया। सर्विलांस टीम का सहयोग भी मामले के खुलासे के लिए लिया जा रहा है। पर अभी तक कोई सुराग नही लग सका है। दूसरी ओर रामपुरा थानाध्यक्ष बृजनेश यादव ने अनिल दीक्षित की तहरीर पर डकैती और हत्या के प्रयास का मुकदमा तो अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज तो कर लिया लेकिन जिस तरह से वे बेफिक्री दिखा रहे हैं। उससे लगता नही है कि वारदात को उन्होंने गंभीरता से लिया है। इसी बीच अनिल दीक्षित की पुत्री गुड़िया और भाई महेश चंद्र दीक्षित को जिला अस्पताल में उनकी हालत उपचार के दौरान बिगड़ जाने पर बाहर के लिए रेफर कर दिया गया है।

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