26orai07उरई। सदर सीट के लिए अज्ञात कुलशील के महेंद्र कठेरिया को सिटिंग विधायक का टिकट काटकर सपा द्वारा उम्मीदवार बनाये जाने के बाद लोग इस सस्पेंस का जबाब खोज रहे हैं कि आखिर कठेरिया की लाटरी किसकी मेहरबानी से लगी।
सपा के सूत्रों ने बताया कि समाजवादी पार्टी के नवोदित प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम जहां रहते हैं वहीं महेंद्र कठेरिया के एक रिश्तेदार का घर है। महेंद्र कठेरिया अक्सर वहीं डेरा जमायें रहते थे। जिसकी वजह से उनका नरेश उत्तम से ताल्लुक हो गया। नरेश उत्तम के वीटो की वजह से ही उरई विधानसभा क्षेत्र में सिटिंग विधायक दयाशंकर वर्मा का टिकट काटकर उन्हें उम्मीदवार बनाने का अप्रत्याशित निर्णय ले लिया गया।
उधर समाजवादी पार्टी के सूत्र यह भी बता रहे हैं कि अखिलेश यादव उम्र के फैक्टर और मौजूदा विधायक दयाशंकर वर्मा की मितव्ययी आदत से बेहद नाराज थे। जिसकी वजह से उनके टिकट पर कैंची चलाने की मानसिकता उन्होंने पहले से ही बना ली थी। ऐसी हालत में पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी या उनके द्वारा संस्तुत सेवा निवृत्त सीएमएस डाॅ. वीवी आर्या को टिकट मिलने के अंदाजे जाहिर किये जा रहे थे। लेकिन बुंदेलखंड में सपा के समीकरण अंदरूनी लड़ाई के नतीजो के बाद पूरी तरह बदल गये हैं। सीएम अखिलेश को न चाहते हुए भी उन्हें सपोर्ट करना पड़ रहा है जो उनके चाचा रामगोपाल यादव के मुनीम हैं। उन्हें मालूम है कि इन मुनीमों द्वारा दूसरी पार्टी के नेताओं से सांठगांठ करके समाजवादी पार्टी के बैनर पर कमजोर प्रत्याशी तय कराने में भी महारथ हासिल है। लेकिन राजनीति दो कदम आगे, एक कदम पीछे का नाम है। इसलिए उनके लिए प्रोफेसर चाचा की बात मानना लाजिमी है। इसी चक्कर में घनश्याम अनुरागी एंड कंपनी से मुंह मोड़ लेना उनकी मजबूरी थी।
इस धुप्पल में महेंद्र कठेरिया टिकट तो पा गये हैं लेकिन विजय चैधरी की बसपा से उम्मीदवारी तय होने के बाद जो फीड बैक अखिलेश तक पहुंचा है। उसके चलते यह संभव है कि दयाशंकर वर्मा एंड कोटरी यह प्रचार सही निकल जाये कि एक-दो दिन में पार्टी का निर्णय बदल जायेगा और बाजी उनके हाथ में आ जायेगी।

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