0 कहीं पचास तो कहीं सौ ग्राम तक का गिरा ओला, किसानों ने प्रशासन के आगे सुनाई व्यथा
कोंच-उरई। पिछले साल हुई ओलावृष्टि से तबाह हुआ किसान अभी अपनी बर्बादी समेटने में लगा ही था और अबकी दफा अच्छी फसलें देख गुजरे साल का नुकसान भुलाने की कोशिश कर ही रहा था कि बीती देर शाम से रुक रुक कर शुरू हुई बूंदाबांदी ने देर रात और भोर के वक्त में ऐसा कहर बरपाया कि किसान की रीढ ही टूट कर रह गई। तेज अंधड़ के साथ मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की फसलें बर्बाद कर दीं, खेत तालाब बन गये, तहसील क्षेत्र का कोई भी इलाका अछूता नहीं रहा जहां ओला न गिरा हो। मिली खबरों में बताया गया है कि कहीं कहीं सौ ग्राम तक के ओले गिरे हैं जिससे किसान पूरी तरह बर्बाद हो गया है। कई गांवों के किसानों ने तहसील में आकर प्रशासन के सामने अपना दुखड़ा रोया और सर्वे करा कर मुआवजा दिये जाने की मांग की।
हालांकि दो दिन पहले ही नेट भारी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी दे चुका था लेकिन ऊपर बाले के रहमो करम पर टिकी किसान की जिंदगी में कब कौन सी आफत आ जाये, कुछ कहा नहीं जा सकता है। बीती देर शाम छिटपुट बारिश शुरू हुई लेकिन चढती रात और भोर में तेज हवाओं के साथ भीषण ओलावृष्टि शुरू हो गई और देखते ही देखते लहलहाती फसलें छिन्न भिन्न हो गईं, खेत तालाब बन गये। ऐसी भीषण तबाही देख किसान की आंखों में आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शुक्रवार को ग्राम प्रधान संगठन के झांसी मंडल अध्यक्ष आमोदकुमार उदैनिया की अगुवाई में ऊंचागांव, दाबर, ककरौली, तूमरा, सिवनी बुजुर्ग, ऐबरा, सींगपुरा, सलैया खुर्द, बैड़ा, जैतपुरा, खजुरी, मऊ, तजपुरा, सदूपुरा, महेशपुरा, गोरा करनपुर, कुदरा खुर्द, कुदरा बुजुर्ग, चमेंड़ आदि दर्जनों गांवों के किसानों तथा प्रधानों शिवराजसिंह कुशवाहा, संजीव पाठक, जितेन्द्र पांडे, तिलकसिंह, नरेन्द्रपाल सिंह, बाबू कुशवाहा, इमरतीदेवी, छोटेसिंह, मानवेन्द्रसिंह, प्रेमनारायण, प्रतापसिंह, मानसिंह, सुनील श्रीवास्तव, रामसिंह जाटव, रामप्रकाश कुशवाहा, माताप्रसाद, सुरेशकुमार, धनसिंह, मिहीलाल, सीताराम, फूलसिंह आदि ने एसडीएम मोईन उल इस्लाम को प्रार्थना पत्र देकर कहा है कि फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और किसान दाने दाने को मोहताज हो गया है। प्रशासन इस नुकसान का सर्वे करा कर सरकार से पर्याप्त मुआवजा दिलवाये। एसडीएम ने भी किसानों को मदद का भरोसा दिया है।







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