उरई। गरीबों के लिए आने वाले सरकारी राशन में घटतौली का लंबा खेल चल रहा है। ऊपर से लेकर नीचे तक इस खेल में सभी लोग शामिल हैं। आखिर में इस खेल में गरीब ही पिस रहे हैं। इसे लंबे खेल में कोटेदारों से लेकर अधिकारी तक शामिल हैं जिसके चलते यह खेल रुक नहीं पा रहा है। बीते कई वर्षों से सरकारी राशन में घटतौली का खेल चल रहा है। अंत्योदय कार्ड पर 20 किलोग्राम गेहूं, 15 किलो चावल, दो लीटर केरोसिन, दो किलोग्राम चीनी पात्रों को दी जाती है। वहीं गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार को तीन किलो गेहूं व दो किलो चावल प्रति व्यक्ति के हिसाब से दिया जाता है। इसके अलावा यह कार्ड धारक को दो लीटर केरोसिन व 900 ग्राम चीनी भी उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा गरीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन करने वाले परिवार को केवल दो लीटर केरोसिन दिया जाता है। गेहूं, चावल से लेकर केरोसिन व चीनी के वितरण तक में घटतौली का खेल चल रहा है। कोटेदारों को मिलने वाले राशन में पहले से ही कटौती कर दी जाती है। ऊपर स्तर से शुरू होने वाली यह घटतौली उपभोक्ताओं पर आकर खत्म होती है। आखिर में उपभोक्ताओं के साथ घटतौली करके सारा नुकसान वसूल किया जाता है। समय-समय पर उपभोक्ता इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से तो करते रहते हैं पर घटतौली के इस खेल पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।






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