.उरई। इस बार के विधानसभा चुनाव में अवैध खनन भी चुनावी मुद्दा बनकर सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने मैनीफेस्टो में अवैध खनन को बंद करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाकर अवैध खनन बंद करने की बात कही है। इससे सवाल यह उठने लगा है कि क्या वाकई में बुंदेलखंड में लाल सोने का अवैध कारोबार बंद हो जाएगा अगर ऐसा होता है तो इससे बुंदेलखंड के लोगों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी पर अवैध खनन बंद होने पर संशय है क्योंकि लंबे समय से सत्तारूढ़ राजनीतिक दल की कमाई का मुख्य जरिया अवैध खनन ही रहा है और इसी के जरिए करोड़ों के वारे-न्यारे किए गए हैं। बुंदेलखंड में बीते एक दशक में अवैध खनन का कारोबार दिन दूनी और रात चौगुनी तरीके से बढ़ता है। इस अवैध खनन के चक्कर में अब तक दर्जनों लोगों की जान भी जा चुकी है। अवैध खनन की वजह से बुंदेलखंड की सड़कों की हालत इतनी खराब हो गई है कि नेशनल हाईवे तक में कई फीट गहरे गड्ढे हो चुके हैं जबकि अन्य सड़कों की हालत तो यह है कि उन पर पैदल चलना भी दूभर है। सूबे में जो भी राजनीतिक दल सरकार में रहा है उसने ही इस अवैध कारोबार को बढ़ावा दिया है। अवैध खनन का सबसे बड़ा कारोबार बुंदेलखंड में ही होता है। यहां से निकली बेतवा नदी में बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जाता है। पोकलैंड मशीनों ने नदियों का सीना चीरकर रख दिया है। नदियों किनारे जिन किसानों के खेत में उन किसानों को खेती करना भी मुश्किल हो गया है। यमुना नदी में भी बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जाता है। अब तक इस अवैध खनन में दर्जनों लोग अपनी जानें गंवा चुके हैं। अवैध खनन के तार सीधे राजधानी से जुड़े होने के कारण स्थानीय स्तर पर अधिकारी व पुलिसकर्मी इसके खिलाफ  ठोस कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठा पाते हैं। हालांकि पिछले कुछ महीनों से अवैध खनन में काफी गिरावट आई है। जब से न्यायालय द्वारा अवैध खनन की जांच सीबीआई से कराने के आदेश दिए गए हैं तब से चोरीछिपे तरीके से अवैध खनन किया जा रहा है। अवैध खनन का यह कारोबार अब चुनावी मुद्दा बन चुका है। शनिवार को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा विधानसभा चुनाव के लिए जारी किए गए घोषणा पत्र में यह घोषणा की गई है कि भाजपा की सरकार बनने पर स्पेशल टास्क फोर्स बनाकर अवैध खनन का कारोबार बंद किया जाएगा। क्या वाकई में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रदेश में अवैध खनन बंद हो जाएगा? इसे लेकर संशय बना हुआ है। हालांकि अन्य राजनीतिक दलों के घोषाणपत्र से अवैध खनन का मुद्दा गायब है। इसका प्रमुख कारण यह है कि अवैध खनन से पार्टियों को काफी तगड़ा मुनाफा होता है जिसके चलते राजनीतिक दल व सरकारें इसे बंद करने की हिम्मत नहीं जुटा पाती हैं अगर वाकई में चुनाव बाद अवैध खनन बंद होता है तो इससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। नदियों को भी तबाह होने से बचाया जा सकेगा जिससे प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में काफी मदद मिलेगी। अवैध खनन के चलते बुंदेलखंड व जनपद जालौन की सड़केें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। खनन माफियाओं ने नेशनल हाईवे तक को नहीं बख्शा है। नेशनल हाईवे पर इतने गहरे गड्डे हो गए हैं कि यहां से वाहन तेज गति से निकलना खतरे से खाली नहीं रह गया है। मतदाताओं को उम्मीद है कि शायद अब उन्हें लाल सोने की इस लूट से मुक्ति मिलेगी।

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