उरई। कालपी विधानसभा क्षेत्र में गठबंधन के बीच कांग्रेस हाईकमान ने सीधे सिटिंग एमएलए उमाकांति सिंह की उम्मीदवारी को बहाल रखने का फरमान सुना दिया है इसके बावजूद उक्त सीट पर जारी उठापटक अभी शांत नही हो पा रही है। समाजवादी पार्टी का एक धड़ा स्थानीय कारणों से इस सीट पर बहुत दिलचस्पी ले रहा है। जिसके चलते तीन दिन पहले पार्टी के महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने झांसी जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष राकेश पाल के लिए इस सीट का लैटर जारी कर दिया था। इसे आधार बनाकर राकेश पाल मैदान छोड़ने से इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि अपने पार्टी हाईकमान के आदेश के पालन के लिए वे कालपी में जोर आजमाइश को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें कदम वापस खीचने का कोई निर्देश भी नही भेजा है जिससे साफ है कि उन्हें चुनाव लड़ना पड़ेगा। भले ही कांग्रेस प्रत्याशी उमाकांति सिंह से दोस्ताना संघर्ष करना पड़े।
सपा-कांगे्रस गठबंधन में कालपी सीट की उलझी गुत्थी सुलझ नही पा रही है। यह सीट पिछले चुनाव में कांग्रेस के कब्जे में आ गई थी। जबकि सपा को इस सीट पर तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। इस कारण कांग्रेस ने प्रदेश की जिन सीटों पर सबसे पहले दावेदारी की थी उनमें कालपी शामिल थी। इसके बावजूद अमेठी और सुल्तानपुर की सीटों के लिए हुई सौदेबाजी में कांग्रेस को अपने हिस्से की कुछ सीटें सपा के लिए छोड़ने की हामी भरनी पड़ी। इसमें सपा की ओर से कालपी सीट को स्थानीय राजनीति की वजह से मांग लिया गया। कांग्रेस की ओर से इसका उत्तर आने के पहले ही रामगोपाल ने इस सीट पर राकेश पाल को उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह देने का लैटर चुनाव आयोग के लिए जारी कर दिया। इससे उमाकांति सिंह के खेमे में हड़कंप मच गया। रविवार को उनके पति सुरेंद्र सिंह सरसेला और कांग्रेस के कई कददावर नेता लखनऊ पहुंच गये जहां उन्होंने सीएम अखिलेश के साथ संयुक्त रूप से शुरू होने वाली प्रेस वार्ता के पहले राहुल गांधी से मुलाकात की। राहुल ने उनका टिकट कटने की चर्चाओं पर अचरज जताते हुए तत्काल नई तिथि में उन्हें चुनाव चिन्ह देने का लैटर जारी करा दिया।
अंदाजा लगाया जा रहा था कि इसके बाद कालपी को लेकर गठबंधन में खींचतान का अंत हो जायेगा। लेकिन अभी भी इस सीट पर संशय की स्थिति बरकरार है। राकेश पाल हर सूरत में पर्चा भरने के लिए डटे हैं जबकि उमाकांति सिंह का खेमा भी पूरी तरह आश्वस्त है। सोमवार को उनकी ओर से चालान फार्म भी खरीद लिया गया। हालांकि राकेश पाल ने पहले दिन चालान फार्म नही खरिदवाया। खींचतान की इस हालत के चलते कालपी सीट को लेकर सस्पेंस और ज्यादा बढ़ गया है।






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