कोंच-उरई। यहां बड़ी माता मंदिर पर जारी श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस की कथा में कथा व्यास पं. विष्णुकांत शास्त्री ने कहा कि भगवन्नाम स्मरण से ही पतितों का उद्धार हो जाता है। उन्होंने अजामिल का उपाख्यान सुनाया, कहा कि अजामिल बड़ा अत्याचारी था परंतु अंत समय में उसने अपने मुख से भगवान का नाम लिया जिससे उसका उद्धार हो गया। बैसे तो उसने अपने बेटे का नाम लिया था परंतु मृत्यु के समय जब यमराज उसे लेने आए तो वह अपने बेटे नारायण को बुलाने लगा मगर उसके बेटे नारायण ने नहीं सुना परंतु भगवान नारायण के दूत उसे लेने आ गए और उसकी यमराज के दूतों से रक्षा की, तब उसने देखा कि अपने बेटे का नाम ले रहा था। वह सोचने लगा कि अगर भगवान का नाम सच्चे मन से ले तो भगवान भी उसे मिल जाएगा। उसने अपने मुख से मरते समय भगवान का नाम उच्चारण किया जिससे अंत समय में उसका उद्धार हो गया और भगवान का धाम उसे मिला।
बाबा तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में कहा है कि, मरतहूं जासु नाम मुख आबा, अधमहु मुकुत होय श्रुति गावा कथा व्यास कहते हैं कि अगर मृत्यु के समय व्यक्ति भगवान का नाम उच्चारण कर लेता है उसे भगवत धाम ही मिलता है और उसका उद्धार हो जाता है। अतः भगवान का नाम जिस अवस्था में हो उस अवस्था में नाम उच्चारण करते रहना चाहिए और प्रहलाद चरित्र की कथा श्रवण कराई इसी दौरान महंत अशोकदास, श्रीशतचंडी आचार्य ज्योतिर्विद पं. संजय रावत, विद्वान ब्राह्मण रामेश्वरदयाल शास्त्री, जयगोविंद मिश्रा, लल्लूराम मिश्र, मुन्ना शास्त्री, शिवाकांत तिवारी, मुकेश तिवारी, राहुल तिवारी, रुपेश तिवारी, अनुज मिश्रा, अनुभव गौतम, सागर बोहरे शास्त्री, संदीप शाण्डिल्य, नवनीत शास्त्री, पंकज तिवारी, अंकित गौतम आदि मौजूद रहे। परीक्षित विजय सिंह निरंजन ने भागवतजी की आरती उतारी। कार्यकर्ता रामविहारी कुशवहा, राघवेंद्र कुशवाहा, हरिओम प्रजापति, निखिल पटेल, अखिलेश पटेल आदि मौजूद रहे।






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