उरई। आखिरकार उरई कोतवाली पुलिस पर लापरवाही का आरोप सही साबित हुआ। बीते दिनों चमारी के जंगलों में मिले अधेेड़ के शव मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी ने हत्या की बात कबूल की है। इस मामे में परिजनों ने उरई कोतवाली पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बवाल काटा था। हत्या के आरोपी द्वारा अपना गुनाह कबूल लेने के बाद भी अभी तक उरई कोतवाली के लापरवाह जिम्मेदारों के खिलाफ  कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
शहर के मोहल्ला इंदिरा नगर निवासी अमृत लाल (50 वर्ष) 5 नवंबर को लापता हो गया था। इसके बाद उसकी पत्नी संतो देवी ने उरई कोतवाली में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसके पड़ोस में रहने वाले जितेंद्र राजपूत नाम के युवक व उसके परिवार से अमृत लाल का कुछ दिन पूर्व विवाद हो गया था। इस मामले में अमृत लाल को आरोपी ने अपने पैतृक गांव बम्हौरी में समझौता के लिए बुलाया था। तब से वह वापस घर नहीं लौटा। कई बार उरई कोतवाली पुलिस को आरोपी के खिलाफ नामजद तहरीर देने के बाद भी उरई कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ  कोई कार्रवाई नहीं की। बीती 18 जनवरी को अधेड़ का शव चमारी के जंगलों में एक कुंए के अंदर मिला था। 19 जनवरी को शव के पोस्टमाटम के बाद परिजनों ने अधेड़ का शव कोतवाली के सामने रखकर हंगामा शुरू कर दिया था। इसके बाद परिजनों के आक्रोश को थामने के लिए पुलिस ने आनन-फानन में आरोपियों के खिलाफ  हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। इस मामले में पुलिस ने हत्या के मुख्य आरोपी जितेंद्र राजपूत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस बारे में आटा थानाध्यक्ष विनोद कुमार मिश्रा का कहना है कि हत्या के मुख्य आरोपी जितेंद्र राजपूत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। उसने यह बात कबूल की है कि उसका अमृत लाल से विवाद हुआ था। इस मामले में समझौते के लिए उसने अमृत लाल को अपने पैतृक गांव बम्हौरी बुलाया था। बातचीत के दौरान अमृत लाल ने उससे गालीगलौज कर दी। इससे गुस्से में आकर जितेंद्र ने उसके सिर में डंडा मार दिया जिसके चलते अमृत लाल की मौत हो गई। इसके बाद वारदात पर पर्दा डालने के लिए उसके शव को ठिकाने लगाया गया। थानाध्यक्ष वीके मिश्रा का कहना है कि अन्य आरोपियों की भी तलाश की जा रही है। वहीं आरोपी द्वारा वारदात कबूल कर लेने के बाद भी पुलिस महकमे के आला अधिकारियों द्वारा उरई कोतवाली के लापरवाहों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिस तरह डेढ़ माह तक पीड़ित परिवार न्याय की लिए भटकता रहा और कई बार उरई कोतवाली के चक्कर काटता रहा उसके बाद भी कोतवाली पुलिस गंभीर नहीं हुई अगर समय रहते पुलिस सक्रिय हो जाती तो इस वारदात का खुलासा काफी पहले हो सकता था। इस घोर लापरवाही के बाद भी कोतवाली के जिम्मेदारों के खिलाफ  कोई कार्रवाई न होना चर्चा का विषय बना हुआ है।

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