उरई। चुनाव प्रचार में यूपी भर में सीएम अखिलेश का काम बोलता है नारा लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। लेकिन यह दूसरी बात है कि कुठौंद इलाके में यह नारा काम पोल खोलता है के नारे के आगे दब कर रह गया है।
पिछले पांच वर्षों से जालौन-कुठौंद सड़क का न जाने कितनी बार निर्माण और सुदृढीकरण हुआ और कई करोड़ का बजट इस काम के नाम पर ठिकाने लगाया जाता रहा। लेकिन यह सड़क मौजूदा समय में गढढों में तब्दील है। जिस पर लोग चलते हैं तो उनके खराब सड़कों की तकलीफ के जख्म हरे हो जाते हैं।
यह सड़क उस समय एक खराब बानगी बन गई है जब जिले में फोर लेन का चरचराटा है। कभी विश्व की सबसे खराब सड़क में शुमार कर ली गई थी जोल्हूपुर-हमीरपुर रोड लेकिन इस सड़क के दिन भी बहुरे और अब यहां फोर लेन का ट्रैफिक सर्राटा भर रहा है। उरई से जालौन सड़क इस समय भले ही चारों तरफ खुदी पड़ी हो लेकिन यह युद्ध स्तर पर चल रहे फोर लेन निर्माण के कार्य की वजह से है। जिसके चलते मुश्किलों के पहाड़ लोगों को फूलों के कोमल दामन की तरह महसूस हो रहें हैं। और तो और विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की अधिसूचना जारी होने के पहले जालौन से औरैया तक की सड़क को फोर लेन बनवाने की मंजूरी अखिलेश सरकार दे चुकी है।
सड़क विकास की निशानी मानी जाती है। जिसके चलते ताबड़तोड़ फोर लेन निर्माण के कामों की अंतिम दिनों में शुरूआत कराकर अखिलेश ने लोगों के दिल में बैठ जाने की बहुत कामयाब चाल तो चली लेकिन बनने के कुछ महीनों में ही उखड़ जाने वाली सड़कों के तजुर्बे ने लोगों को इतना शंकालु बना दिया है कि सरकार इस रिपोर्ट कार्ड के रहते उनका विश्वास शायद ही जीत पाये। ऐसे में जालौन-कुठौद मार्ग जैसी सड़कों की वर्तमान हालत फोर लेन की सुनहरे तस्वीरों को बरतरफ कर उनके जख्म कुरेदने का सबब बन गईं हैं।
भाजपा के जिला उपाध्यक्ष शैलेंद्र पांडेय से अखिलेश सरकार की कथनी और करनी में अंतर का नमूना बताते हैं तो महान दल के मुकेश कठेरिया कहते हैं कि सपा की सरकार में सिर्फ कागजों और नारों में विकास होता है। मुन्ना लाल चैरसिया के मुताबिक प्रस्तावित फोर लेन के दिलासे में अखिलेश सरकार जालौन-कुठौंद मार्ग पर आवगमन करने वाली बड़ी आबादी को बहला नही सकती। बहरहाल विधानसभा चुनाव में यह मुददा महागठबंधन के लिए गहरा घाव देने वाला पैना तीर साबित हो सकता है।





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