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उरई । समाजवादी पार्टी के निवर्तमान विधायक दयाशंकर वर्मा की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही ।

उन्हौने कई महीने पहले चुनाव तैयारी शुरू कर दी थी जिसके तहत सरकारी सहायता वितरण के हर कार्यक्रम मे

वे गाड़ी बैल पटेल की , बंदे की ललकार की तर्ज पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने लगे थे ।

लेकिन जैसे ही चुनाव का बिगुल विधिवत बजा पार्टी ने उनके साथ ऐसा दाव किया कि उनके होश उड़ गए । पार्टी ने उनकी जगह महेंद्र कठेरिया को उम्मीदवार घोषित कर दिया

पार्टी के पास खबर यह थी कि गर्दिश के दिन दिखने पर वे सपा को डूबता जहाज मान बैठे थे और भाजपा मे

अपने लिए गुंजाइश टटोलने लगे थे । हक्का बक्का दयाशंकर चुनाव प्रचार की चौकड़ी भूलकर लखनऊ टिकट बचाने पहुँच गए । इस मशक्कत में एक सप्ताह तक उनकी हलचलें ठप रही और तब तक प्रतिद्वंदी उम्मीदवार चुनाव मैदान मे अपना सिक्का जमाने मे सफल होते चले गए । इस बीच मुकद्दर के सिकंदर के खिताब से अपने समर्थकों मे नवाजे जा रहे दयाशंकर ने सपा हाइकमान से दुबारा अपने लिए आशीर्वाद तो प्राप्त कर लिया हैं लेकिन उनकी राह मे काटों का अंत अभी भी नहीं हुआ है ।

महेंद्र कठेरिया की उम्मीदवारी निरस्त होने के मामले मे पुरानी कहावत चरितार्थ हो रही है जिसमे कहा जाता था कि खसम किया बुरा किया , छोड़ दिया और बुरा किया । महेंद्र का टिकट काटने से दलितों का एक बड़ा वर्ग स्थानीय स्तर पर सपा को सबक सिखाने के लिए आस्तीने चढ़ाने लगा है । इनमे कठेरिया जाति के पुश्तैनी कामो से मिलती जुलती पाँच जातियाँ तो बहुत ही मुखर है जबकि धोबी समाज भी सपा के फ़ैसले से अपने को आहत महसूस कर रहा है । इन बिरादरियों का कहना है कि अगर सपा को अपना विधायक ही बहाल रखना तो महेंद्र कठेरिया की उम्मीदवारी का ऐलान बीच मे क्यों कर दिया गया था । उन्होने मेहनत भी की और पैसा भी खर्च किया लेकिन फ़ैसला पलट कर उनकी बेइज्जती तो की ही गयी उनको बर्बाद भी कर दिया गया ।

दलितों मे फुटकर बिरादरियों को यह टीस भी है कि रिजर्व सीट को दो जातियों का बंधक समझ लिया गया है । भाजपा का उम्मीदवार कोरी होने से सपा द्वारा दूसरी बिरादरी की ओर देखा जाना रणनीतिक तौर पर गलत नहीं था लेकिन आखिरकार सपा हाइकमान ने कोरी बिरादरी का ही प्रत्याशी बनाने को मजबूरी माना और यह पैगाम दे डाला कि दूसरी पार्टियों की तरह सपा ने भी रिजर्व सीट पर उम्मीदवारी के मामले मे लक्ष्मण रेखा तय कर रखी है । लक्ष्मण रेखा का यह मिथक टूटे तभी रिजर्व सीट पर फुटकर दलित जातियों को आगे करने का साहस सपा जैसी पार्टी के लिए मुमकिन होगा । फुटकर दलित जातियों की आह इस मामले मे इतनी बुलंद साबित हो रही है कि सपा के चुनावी कैम्पेन की चूले हिली जा रही है । गौरतलब है कि गत विधानसभा चुनाव मे गैर चौधरी , गैर कोरी दलित बिरादरियों का वोट बहुतायत मे सपा को मिला था ।

दयाशंकर वर्मा के लिए पदोन्नति मे  आरक्षण का मुद्दा भी अंदर खाने मे गले की फाँस बना हुआ है । सपा सरकार ने इस पर रोक लगाकर कई प्रमोटिड दलित अफसरों को रिवर्ट कर दिया था । इसके कारण अफसर और कर्मचारी चुनाव के मौके पर नाते रिश्तेदारों के बीच जाकर सपा के खिलाफ जहर उगलने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे जिसका असर भी हो रहा है । यहाँ तक कि कोरी बिरादरी के लोग भी प्रमोशन मामले मे गड़े मुर्दे के उखाड़े जाने पर सपा के ख़िलाफ़ बिदकने मे पीछे नहीं रहते ।

उधर सोशल और एलेक्ट्रोनिक मीडिया का प्लेट फार्म दयाशंकर के विरोध की ख़बरों से रंगा हुआ है । निर्माण से लेकर इलाज के लिए सहायता मंजूर करने मे दयाशंकर वर्मा द्वारा अपनाये गए पैमाने से संबंधित खबरें लोगो को सच्ची लगती है जो उनकी चुनावी सेहत सबसे ज्यादा खोखला कर रही है । यह वायरल किया जा रहा है कि दयाशंकर  वर्मा के यहाँ साधारण लिखे पैड तक की एक कीमत थी । इस दुष्प्रचार की हवा निकाली जा सकती है बशर्तें दयाशंकर के पास विधायक निधि से करवाये गए कुछ ऐसे कार्यों की मिसाले हो जो उनके पैमाने को साफ़सुथरा और खरा साबित कर सके लेकिन एक भी ऐसी मिसाल ढूँढ पाने मे दयाशंकर अपने को लाचार महसूस कर रहे है ।

एक युवती ने उनके भाई पर अपने साथ रेप का आरोप लगाया था जिसे चुनावी मौके पर बढ़ाचढ़ा कर पेश किया जा रहा है । इसी कड़ी मे अंजली नाम की एक महिला की बाइट ने उनकी नाक मे दम कर दिया है जिसका आरोप है कि विधायक ने उसका पर्चा दाखिल न होने देने की दबंगयी दिखाई जबकि विधायक कह रहे है कि वे किसी को पर्चा भरने से कैसे रोक सकते है लेकिन बदकिस्मती यह है कि उनकी सफाई को नाककारखाने मे तूती की आवाज जितनी अहमियत भी नहीं मिल रही ।

पिछले चुनाव मे दयाशंकर वर्मा की जीत मे निर्णायक भूमिका कुर्मी वोटरों ने निभाई थी जिन पर भाजपा ने इस बार माधौगढ़ से कुर्मी उम्मीदवार बना कर मजबूत पंजा जमा लिया है । दयाशंकर के लिए इतनी चुनौतियों के वावजूद मुकद्दर मेहरबानी करता है तो माना जाएगा कि वे कामयाबी की मंजिल चढ़ने के बाद  ऐसे सिकंदर बन गए  है जिसे कोई हरा नहीं पाएगा ।

 

 

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