उरई। समाजवादी पार्टी में प्रत्याशी बदलने का ड्रामा नामांकन के आखिरी दिन तक जारी रहा। सोमवार को पार्टी ने एक बार फिर जिले में अपने इकलौते सिटिंग विधायक दयाशंकर वर्मा की बलि चढ़ाकर महेंद्र कठेरिया को प्रत्याशी घोषित कर दिया। सपा के इस फैसले को लेकर तमाम बतकही हो रही हैं। बताया यह जा रहा है कि सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम के वीटो की वजह से यह फेरबदल किया गया है। उधर निवर्तमान विधायक दयाशंकर वर्मा ने आज निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में एक और सैट दाखिल कर दिया।
कठेरिया ने चुनाव के लिए कर दिया था जमीन का सौदा
महेंद्र कठेरिया का टिकट पहले भी नरेश उत्तम ने ही तय किया था। महेंद्र के रिश्तेदार बृजेश कठेरिया नरेश उत्तम के पड़ोसी हैं। जिसके चलते महेंद्र भी लंबे समय से नरेश उत्तम की सेवा में लगे हुए थे। जनचर्चा के मुताबिक महेंद्र कठेरिया ने प्रत्याशी घोषित होने के बाद चुनाव के बजट की व्यवस्था के लिए अपनी जमीन बेंचने की पेशगी ले ली थी।
आखिर नरेश उत्तम को लगाना पड़ा वीटो
इसी बीच चार दिन पहले समाजवादी पार्टी ने उरई सदर सुरक्षित सीट पर यू टर्न ले लिया और महेंद्र कठेरिया की उम्मीदवारी निरस्त कर विधायक दयाशंकर वर्मा को पार्टी के सिम्बल का अथाॅर्टी लैटर जारी कर दिया। इसके बाद 4 फरवरी को एक ओर दयाशंकर वर्मा ने माधौगढ़ के कांग्रेस प्रत्याशी विनोद चतुर्वेदी के साथ संयुक्त जुलूस निकालकर पूरे गाजे-बाजे के साथ नामांकन दाखिल किया तो दूसरी ओर अपनी बर्बादी का दुखड़ा लेकर महेंद्र कठेरिया लखनऊ में नरेश उत्तम के दरबार की ओर दौड़ पड़े। इसके चलते आज एक बार फिर पांसा पलटा और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने हस्ताक्षर से महेंद्र कठेरिया के लिए नया अथाॅर्टी लैटर जारी कर दिया।
महेंद कठेरिया और उमाकांति साथ-साथ पहुंचे नामांकन में
महेंद्र कठेरिया के नामांकन दाखिले के समय भी सपा-कांग्रेस का जोड़ा मौजूद रहा। लेकिन इसमें कांग्रेस से माधौगढ़ के प्रत्याशी विनोद चतुर्वेदी की जगह कालपी की प्रत्याशी उमाकांति सिंह शरीक थीं। उधर कालपी में पहले प्रो. रामगोपाल यादव का लैटर लेकर गठबंधन से अपनी उम्मीदवारी का राग अलापते रहे झांसी के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राकेश पाल ने भी आज नामांकन दाखिल किया लेकिन बतौर निर्दलीय प्रत्याशी। इससे साफ हो गया कि फिलहाल कालपी की सीट सपा ने कांग्रेस के खाते में छोड़ दी है।
सपा जिलाध्यक्ष नामांकन से रहे दूर
सदर सीट पर तीसरी बार हुए बदलाव से समाजवादी पार्टी के जिले के पदाधिकारी शायद खिन्न से हैं। सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल दादी ने महेंद्र कठेरिया के नामांकन से अपने को दूर रखा। पूंछने पर उनका कहना था कि उनके पास आधिकारिक रूप से महेंद्र कठेरिया का साथ देने की कोई सूचना केंद्रीय या प्रदेशीय नेतृत्व की ओर से प्राप्त नही हुई है।
दयाशंकर को अभी भी है अपने लिए उम्मीद
उधर स्थितियां ऐसी बनी हुई हैं कि गठबंधन के नेताओं से लेकर आम मतदाताओं तक को नामांकन वापसी के समय तक इस वजह से दम साधकर रहना पड़ेगा कि कहीं आखिरी क्षण तक फिर कोई बदलाव न कर दिया जाये।





Leave a comment